August 15, 2026

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आत्मनिर्भर भारत पर मोदी का बड़ा संदेश: सेमीकंडक्टर से लेकर ‘मेक इन इंडिया’ तक, अगले 8 साल में बदलने वाली है तस्वीर

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत को दूसरे देशों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत करना होगा। देश को अपने हितों की रक्षा खुद करने में सक्षम बनाना आज समय की जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें देश के हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत अब ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्वदेशी’ जैसे अभियानों के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है।

बदलते वैश्विक माहौल में आत्मनिर्भरता क्यों जरूरी?

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दुनिया में किसी भी देश के लिए पूरी तरह दूसरे देशों पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।

ऐसे समय में भारत को अपनी उत्पादन क्षमता, तकनीक और महत्वपूर्ण उद्योगों को मजबूत करना होगा।

उन्होंने आत्मनिर्भर भारत को केवल आर्थिक विकास से जोड़कर नहीं देखा, बल्कि इसे देश की रणनीतिक क्षमता और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा से भी जोड़ा।

आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • देश में जरूरी वस्तुओं और तकनीकों का उत्पादन बढ़ाना।
  • विदेशी निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना।
  • भारतीय उद्योगों और स्टार्टअप को बढ़ावा देना।
  • आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में घरेलू क्षमता विकसित करना।
  • रोजगार और निवेश के नए अवसर तैयार करना।
  • वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाना।

सेमीकंडक्टर सेक्टर पर खास जोर

प्रधानमंत्री ने डिजिटल युग में सेमीकंडक्टर यानी चिप की बढ़ती अहमियत पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज इलेक्ट्रॉनिक सामान से लेकर चिकित्सा उपकरणों और परिवहन प्रणालियों तक, अनेक क्षेत्रों में चिप की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

मोबाइल फोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, आधुनिक मशीनरी और कई तरह के स्मार्ट उपकरणों के पीछे सेमीकंडक्टर तकनीक महत्वपूर्ण आधार के रूप में काम करती है। ऐसे में इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत की अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षमता के लिए बड़ा कदम मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री के अनुसार भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। देश में तीन प्रमुख सेमीकंडक्टर संयंत्र स्थापित किए गए हैं और इनमें उत्पादन शुरू होने के साथ निर्यात की दिशा में भी कदम बढ़ाया गया है।

अगले 7-8 साल में बढ़ेगी उत्पादन क्षमता

प्रधानमंत्री मोदी ने भविष्य की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले सात से आठ वर्षों में पांच से आठ और सेमीकंडक्टर संयंत्र शुरू होने की संभावना है।

अगर यह विस्तार योजनाओं के अनुरूप आगे बढ़ता है तो भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में अपनी भूमिका और मजबूत कर सकता है। इससे घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

सेमीकंडक्टर निर्माण का विस्तार सिर्फ तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। इससे इससे जुड़े डिजाइन, रिसर्च, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में भी अवसर पैदा हो सकते हैं।

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगी नई दिशा

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश का आम नागरिक भी ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्वदेशी’ की भावना से जुड़ रहा है। यह बदलाव भारत की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के साथ घरेलू कंपनियों के लिए बड़ा बाजार तैयार कर सकता है।

आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि भारत की अपनी क्षमता को इतना मजबूत बनाना है कि देश वैश्विक बाजार में मजबूती के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके।

भारत के लिए क्या बदल सकता है?

आत्मनिर्भर भारत के विस्तार से आने वाले वर्षों में कई क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है। खासकर हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में भारत की स्थिति मजबूत होने की संभावना है।

  • सेमीकंडक्टर निर्माण में निवेश बढ़ सकता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है।
  • तकनीकी क्षेत्र में नए रोजगार पैदा हो सकते हैं।
  • भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ सकती है।
  • महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए विदेशी निर्भरता कम हो सकती है।
  • निर्यात के नए अवसर तैयार हो सकते हैं।

मोदी का संदेश—अपनी क्षमता पर भरोसा जरूरी

प्रधानमंत्री मोदी का स्वतंत्रता दिवस संबोधन आत्मनिर्भरता को लेकर एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत को अपनी तकनीकी, औद्योगिक और आर्थिक क्षमताओं का लगातार विस्तार करना होगा।

सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्र में निवेश और उत्पादन को बढ़ावा इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यदि नए संयंत्र स्थापित होते हैं और उत्पादन तथा निर्यात में तेजी आती है, तो भारत वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कुल मिलाकर, आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि तकनीक, उत्पादन, रोजगार और राष्ट्रीय क्षमता को मजबूत करने की व्यापक दिशा के रूप में सामने आ रहा है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया है।