August 5, 2026

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दहेज की मांग ने ली नवविवाहिता की जान, कोर्ट का बड़ा फैसला; पति समेत 5 दोषियों को 10-10 साल की सजा

दुर्ग जिले में दहेज प्रताड़ना के एक बेहद संवेदनशील मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने कड़ा फैसला सुनाते हुए पति समेत पांच दोषियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला एक नवविवाहिता की मौत से जुड़ा है, जिसने शादी के महज 18 महीने बाद लगातार हो रही प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी। न्यायालय के इस फैसले को दहेज उत्पीड़न के मामलों में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

मृतका कंचन राव का विवाह 16 फरवरी 2022 को सामाजिक रीति-रिवाज के अनुसार भिलाई निवासी पी. अमित राव उर्फ बंटी के साथ हुआ था। विवाह के दौरान मायके पक्ष ने अपनी क्षमता के अनुसार दहेज और घरेलू सामान दिया था, लेकिन इसके बावजूद ससुराल पक्ष संतुष्ट नहीं था।

आरोप है कि शादी के बाद से ही पति और परिवार के अन्य सदस्य कंचन को कम दहेज लाने की बात कहकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते थे। इतना ही नहीं, वे कंचन के पिता की जमीन में हिस्सेदारी और बुलेट मोटरसाइकिल खरीदने के लिए नकद राशि की भी मांग कर रहे थे।

दो लाख रुपये देने के बाद भी नहीं रुकी प्रताड़ना

अभियोजन के अनुसार, मार्च 2022 में होली के दूसरे दिन कंचन के भाई ने ससुराल पक्ष को 2 लाख रुपये दिए, ताकि वे बुलेट मोटरसाइकिल खरीद सकें। इसके बाद बाइक खरीदी गई, लेकिन उसे पति के बजाय परिवार के अन्य सदस्य के नाम पर पंजीकृत कराया गया।

जब कंचन ने इस पर सवाल उठाया तो उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई। इसके बाद भी उसे लगातार मानसिक रूप से परेशान किया जाता रहा।

मायके वालों ने भी किया समझाने का प्रयास

कंचन ने कई बार अपने मायके वालों को अपनी पीड़ा बताई थी। परिवार के लोगों ने ससुराल पक्ष को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन कोई सकारात्मक बदलाव नहीं आया। लगातार बढ़ती प्रताड़ना से परेशान होकर 28 अगस्त 2023 को कंचन ने अपने कमरे में दुपट्टे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।

कोर्ट ने सुनाई कड़ी सजा

मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुजूर की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक द्रोण ताम्रकार ने प्रभावी पैरवी की।

अदालत ने सभी पांच आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

दोषियों को मिली यह सजा

  • धारा 304-बी (दहेज मृत्यु) के तहत 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास
  • प्रत्येक दोषी पर 1,000 रुपये का अर्थदंड
  • धारा 498-ए (पति या ससुराल पक्ष द्वारा क्रूरता) के तहत 3-3 वर्ष का सश्रम कारावास
  • प्रत्येक पर 1,000 रुपये का अतिरिक्त अर्थदंड

दोषी कौन-कौन हैं?

  • पति पी. अमित राव उर्फ बंटी
  • पी. महेश राव
  • पी. तारा राव
  • पी. अश्विन उर्फ लक्की
  • नम्रता राव उर्फ पूजा

दहेज प्रताड़ना पर सख्त संदेश

यह फैसला उन मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जहां शादी के बाद दहेज की मांग को लेकर महिलाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दहेज के लिए उत्पीड़न और उससे जुड़ी मौत जैसे अपराधों को कानून बेहद गंभीरता से देखता है।

दहेज जैसी सामाजिक कुप्रथा आज भी कई परिवारों की खुशियां छीन रही है। ऐसे मामलों में समय पर शिकायत करना, कानूनी सहायता लेना और समाज का सहयोग प्राप्त करना बेहद आवश्यक है। न्यायालय का यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि दहेज प्रताड़ना करने वालों को कानून किसी भी हाल में बख्शने वाला नहीं है।