July 26, 2026

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शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 331 अंक टूटा, निवेशकों के डूबे 4 लाख करोड़ रुपये; जानें क्यों मचा हाहाकार

शेयर बाजार

शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ बंद, निवेशकों को भारी नुकसान

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को एक बार फिर कमजोरी देखने को मिली। वैश्विक संकेतों और बढ़ती आर्थिक चिंताओं के बीच घरेलू बाजारों में भारी बिकवाली रही। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान पर बंद हुए। इस गिरावट के कारण निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा और कुछ ही समय में बाजार से लाखों करोड़ रुपये की संपत्ति कम हो गई।

बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स शुक्रवार को 331.62 अंक यानी 0.43 प्रतिशत गिरकर 76,059.77 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 भी 102.15 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,767.45 अंक पर बंद हुआ।

निवेशकों को मिनटों में 4 लाख करोड़ रुपये का नुकसान

शुक्रवार के कारोबार में बाजार की गिरावट का असर कंपनियों के कुल बाजार मूल्यांकन पर भी पड़ा।

मुख्य आंकड़े:

बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 477 लाख करोड़ रुपये से घटकर लगभग 473 लाख करोड़ रुपये रह गया।
निवेशकों की संपत्ति में करीब 4 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।
बाजार के लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में दबाव देखने को मिला।

सुबह के कारोबार में गिरावट और भी ज्यादा रही। सेंसेक्स करीब 800 अंक तक टूटकर 75,535 के निचले स्तर पर पहुंच गया था। वहीं निफ्टी 50 भी करीब 250 अंक गिरकर 23,619 के स्तर तक फिसल गया।

सेंसेक्स की 30 में से 20 कंपनियां नुकसान में

बाजार में गिरावट का असर बड़ी कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दिया। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 20 के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।

सबसे ज्यादा दबाव वाले शेयरों में शामिल रहे:

इटरनल के शेयरों में 2 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट।
महिंद्रा और बजाज फाइनेंस के शेयरों में भी बड़ी कमजोरी।
भारती एयरटेल, एशियन पेंट्स और इंफोसिस के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि गिरावट वाले बाजार में कुछ कंपनियों ने मजबूती दिखाई।

बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयर:

एचसीएल टेक
आईटीसी
एक्सिस बैंक
ट्रेंट
टीसीएस
मारुति
बाजार गिरने की बड़ी वजहें

  1. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें शामिल हैं। ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।

तेल की कीमतों में लगातार तेजी से भारत जैसे आयात पर निर्भर देश की चिंता बढ़ गई है। महंगे कच्चे तेल से:

महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है।
कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
आर्थिक विकास पर दबाव पड़ सकता है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल में तेजी से निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है।

  1. अमेरिका-ईरान तनाव का असर

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी बाजार को प्रभावित किया है।

निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

युद्ध जैसी परिस्थितियों में आमतौर पर निवेशक जोखिम वाले बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर जाते हैं।

  1. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भी उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ाया है।

जब अमेरिका में बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलता है तो विदेशी निवेशक भारत जैसे बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिकी निवेश साधनों में लगाना पसंद करते हैं।

इससे भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पूंजी की निकासी बढ़ने की आशंका रहती है।

  1. ट्रंप की टैरिफ नीतियों का डर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीतियों ने भी वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ाई है।

अमेरिका द्वारा कई देशों पर नए आयात शुल्क लगाने से व्यापार युद्ध की आशंका बढ़ गई है। निवेशकों को डर है कि इससे वैश्विक कारोबार प्रभावित हो सकता है और महंगाई बढ़ सकती है।

आगे बाजार की दिशा पर नजर

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में शेयर बाजार की चाल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी।

फिलहाल निवेशक वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय अपने निवेश लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर कदम उठाएं।