July 26, 2026

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छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों पर लगेगी लगाम! IIT मद्रास के साथ हुआ ऐतिहासिक समझौता, 10 जिलों से शुरू होगी नई पहल

छत्तीसगढ़ सड़क सुरक्षा

सड़क सुरक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा कदम

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और लोगों की जान बचाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। परिवहन विभाग ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रोड सेफ्टी के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत राज्य में डेटा-आधारित हाइपरलोकल इंटरवेंशन कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जिससे दुर्घटना संभावित स्थानों की वैज्ञानिक पहचान कर समय रहते प्रभावी सुधार किए जा सकेंगे।

इस अवसर पर रायपुर में एक दिवसीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें वन, परिवहन, आवास एवं पर्यावरण तथा सहकारिता मंत्री केदार कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

10 संवेदनशील जिलों से होगी शुरुआत

नई पहल के पहले चरण में सड़क दुर्घटनाओं की दृष्टि से सबसे संवेदनशील 10 जिलों का चयन किया गया है।

इन जिलों में जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग (PWD) और सड़क सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों को चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक जिले की स्थानीय परिस्थितियों और दुर्घटना के आंकड़ों के आधार पर अलग-अलग डेटा-आधारित सड़क सुरक्षा कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

डेटा के आधार पर होगी ब्लैक स्पॉट की पहचान

कार्यक्रम के तहत सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया जाएगा। इसके माध्यम से उन स्थानों की पहचान होगी जहां बार-बार सड़क हादसे होते हैं।

इसके बाद:

सड़क दुर्घटना ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए जाएंगे।
दुर्घटना संभावित स्थानों पर कम लागत वाले इंजीनियरिंग सुधार किए जाएंगे।
स्थानीय जरूरतों के अनुसार हाइपरलोकल सड़क सुरक्षा उपाय लागू होंगे।
वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेकर दुर्घटनाओं को रोकने की रणनीति बनाई जाएगी।
‘संजय’ प्लेटफॉर्म से मिलेगी तकनीकी मदद

इस परियोजना में ‘संजय’ प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से दुर्घटना संभावित स्थलों की समय पर पहचान कर संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के लिए जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

इससे सड़क सुरक्षा से जुड़े फैसले अनुमान के बजाय साक्ष्य और डेटा के आधार पर लिए जा सकेंगे।

परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने क्या कहा?

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सड़क दुर्घटना केवल एक आंकड़ा नहीं होती, बल्कि किसी परिवार के लिए अपूरणीय क्षति होती है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल दुर्घटनाओं की संख्या कम करना नहीं है, बल्कि ऐसी सुरक्षित सड़क व्यवस्था विकसित करना है जिससे हर नागरिक सुरक्षित अपने घर पहुंच सके। उन्होंने इसे “सुरक्षित छत्तीसगढ़” की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

सचिव एस. प्रकाश ने दिया समन्वय पर जोर

परिवहन विभाग के सचिव एस. प्रकाश ने कहा कि ‘संजय’ प्लेटफॉर्म के जरिए दुर्घटना संभावित स्थानों की वैज्ञानिक पहचान संभव होगी और समयबद्ध हस्तक्षेप से सड़क सुरक्षा को मजबूत किया जा सकेगा।

उन्होंने सभी संबंधित विभागों से आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की अपील की, ताकि सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों में प्रभावी कमी लाई जा सके।

अधिकारियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

कार्यशाला में चयनित 10 जिलों के:

कलेक्टर
पुलिस अधीक्षक (एसपी)
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ)
जिला परिवहन अधिकारी (डीटीओ)
जिला सड़क सुरक्षा समिति के नोडल अधिकारी
जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक

ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने अधिकारियों को डेटा विश्लेषण, ब्लैक स्पॉट पहचान और प्रभावी सड़क सुरक्षा उपायों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया।

मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ सरकार और आईआईटी मद्रास के बीच सड़क सुरक्षा को लेकर ऐतिहासिक एमओयू।
डेटा-आधारित हाइपरलोकल इंटरवेंशन कार्यक्रम की शुरुआत।
पहले चरण में सड़क दुर्घटना प्रभावित 10 जिलों में होगा क्रियान्वयन।
ब्लैक स्पॉट की वैज्ञानिक पहचान कर कम लागत वाले सुधार किए जाएंगे।
‘संजय’ प्लेटफॉर्म के जरिए डेटा-आधारित निर्णय लिए जाएंगे।
जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण।
लक्ष्य: सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाकर सुरक्षित छत्तीसगढ़ का निर्माण।

यह पहल सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। तकनीक, डेटा विश्लेषण और विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों के जरिए राज्य सरकार सड़क हादसों में कमी लाने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में नई मिसाल स्थापित करने की तैयारी कर रही है।