July 28, 2026

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53 करोड़ की फर्जी बिलिंग का मास्टरमाइंड गिरफ्तार! 9.54 करोड़ के GST टैक्स फ्रॉड का बड़ा खुलासा

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य GST विभाग ने GST टैक्स फ्रॉड के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल की है। विभाग ने 53 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग और 9.54 करोड़ रुपये के बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले के मुख्य आरोपी विजय कुमार यादव को गिरफ्तार किया है। आरोपी को 20 जुलाई 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे 3 अगस्त 2026 तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी ने फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों रुपये की बोगस बिलिंग की और अवैध तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाया। इस मामले को राज्य GST विभाग की हालिया सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक माना जा रहा है।

कैसे किया गया करोड़ों का टैक्स फ्रॉड?

जांच के अनुसार विजय कुमार यादव ने मेसर्स माया स्टील एंड एंटरप्राइज और मेसर्स मायरा स्टील एंटरप्राइजेज नाम से दो फर्मों का संचालन किया। इन फर्मों के जरिए लगभग 53 करोड़ रुपये की बोगस बिलिंग की गई।

इसी फर्जी बिलिंग के आधार पर करीब 9.54 करोड़ रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) तैयार कर विभिन्न फर्मों को हस्तांतरित किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने इस फर्जी ITC का उपयोग अपनी कर देनदारियों का भुगतान करने में भी किया।

जांच में सामने आईं बड़ी अनियमितताएं

राज्य GST विभाग की जांच में कई गंभीर गड़बड़ियां उजागर हुईं। इनमें प्रमुख रूप से—

  • 10 बंद या निरस्त GST पंजीयन वाली फर्मों से फॉर्म ITC-02 के माध्यम से 6.13 करोड़ रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया।
  • इन फर्मों के बीच वास्तविक रूप से विलय (Merger), डी-मर्जर या अमलगमेशन नहीं हुआ था, फिर भी ITC ट्रांसफर दिखाया गया।
  • पंजाब सहित अन्य राज्यों की 9 फर्जी या अस्तित्वहीन फर्मों से बिना किसी वास्तविक माल आपूर्ति के 1.99 करोड़ रुपये का फर्जी ITC दावा किया गया।
  • GSTR-2B और GSTR-3B के आंकड़ों में अंतर दिखाकर 1.41 करोड़ रुपये का अतिरिक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया।

बिना माल खरीदे-बेचे तैयार किए गए फर्जी बिल

जांच एजेंसियों के अनुसार पूरे मामले में वास्तविक रूप से किसी प्रकार की खरीद-बिक्री नहीं हुई। केवल कागजी बिलों के आधार पर लेन-देन दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का अनुचित लाभ लिया गया।

आरोपी ने न केवल अन्य फर्मों को 9.54 करोड़ रुपये का फर्जी ITC ट्रांसफर किया, बल्कि स्वयं भी उतनी ही राशि का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट दावा कर उसका उपयोग किया। इससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।

GST विभाग का विशेष अभियान जारी

राज्य GST विभाग लगातार फर्जी बिलिंग, बोगस ITC और टैक्स चोरी के मामलों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है। विभाग का कहना है कि डेटा एनालिटिक्स, ई-वे बिल, GST रिटर्न और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर संदिग्ध फर्मों की पहचान की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में ऐसे मामलों में और भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है। फर्जी बिलिंग नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और फर्मों की भी जांच जारी है।

क्या है बोगस ITC?

इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) वह सुविधा है, जिसके तहत व्यापारी अपनी खरीद पर चुकाए गए GST को अपनी बिक्री पर देय GST से समायोजित कर सकते हैं। लेकिन यदि बिना वास्तविक खरीद-बिक्री के फर्जी बिल बनाकर ITC का दावा किया जाता है, तो इसे बोगस ITC या GST टैक्स फ्रॉड माना जाता है। यह गंभीर आर्थिक अपराध है, जिसमें गिरफ्तारी, भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है।

राज्य GST विभाग ने स्पष्ट किया है कि कर चोरी और फर्जी बिलिंग के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।