महासमुंद जिले में आवारा और खुले में घूमने वाले मवेशियों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं और पशु संरक्षण को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की अध्यक्षता में आयोजित जिला पशु क्रूरता निवारण समिति की बैठक में पशु कल्याण, पशु संरक्षण और पशुओं के प्रति क्रूरता रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपमा आनंद, अपर कलेक्टर सचिन भूतड़ा, रवि साहू, समिति के सदस्य तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी और अशासकीय सदस्य उपस्थित रहे।
सड़कों से हटाए जाएंगे आवारा मवेशी
कलेक्टर ने उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्य सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर घूम रहे मवेशियों को हटाने के लिए सभी संबंधित विभाग संयुक्त अभियान चलाएं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इस अभियान को प्राथमिकता के साथ लागू किया जाए ताकि सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
हर पशु पर लगेगी रेडियम पट्टी और टैग
बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सड़कों पर विचरण करने वाले पशुओं के गले में रेडियम पट्टी लगाई जाए, जिससे रात के समय वाहन चालकों को पशु आसानी से दिखाई दें और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो।
इसके साथ ही—
- पशुओं की टैगिंग की जाए।
- मालिकों की पहचान सुनिश्चित की जाए।
- पशुओं को खुले में छोड़ने वाले मालिकों को पहले समझाइश दी जाए।
- बार-बार लापरवाही करने वालों पर नियमानुसार जुर्माना लगाया जाए।
कई विभाग मिलकर चलाएंगे अभियान
कलेक्टर ने निम्न विभागों को संयुक्त कार्रवाई के निर्देश दिए—
- जनपद पंचायत
- नगर पालिका एवं नगर पंचायत
- राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)
- पशुपालन विभाग
- यातायात पुलिस
- अन्य संबंधित विभाग
उन्होंने कहा कि स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए ताकि अभियान प्रभावी और सफल बन सके।
पशु क्रूरता पर होगी सख्त कार्रवाई
बैठक में कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि—
- पशु क्रूरता की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई की जाए।
- पशु संरक्षण अधिनियम का सख्ती से पालन कराया जाए।
- आम लोगों को पशु कल्याण के प्रति जागरूक किया जाए।
पशुपालन विभाग ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
पशुपालन विभाग की उप संचालक डॉ. अंजना नायडू ने बताया कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत अशक्त पशुओं को सड़क पर छोड़ना या उन्हें जानबूझकर भटकने देना दंडनीय है।
उन्होंने वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की।
जिले में अब तक की कार्रवाई
- 2,073 पशुओं की टैगिंग
- 7,719 आवारा पशुओं का विस्थापन
- 1.67 लाख रुपये से अधिक जुर्माना वसूला गया
- 3,028 पशुओं को रेडियम बेल्ट पहनाई गई
- 6 गोधामों के संचालन को स्वीकृति
आवारा श्वानों के लिए भी चल रहा अभियान
बैठक में बताया गया कि जिले में आवारा एवं पालतू श्वानों का—
- टीकाकरण
- बधियाकरण
- उपचार
नियमित रूप से किया जा रहा है।
मुख्य नगरपालिका अधिकारी ने जानकारी दी कि तुमाडबरी में पशु जन्म नियंत्रण केंद्र शुरू किया जा रहा है, जिससे आवारा श्वानों की संख्या नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
गौशालाओं और पशु आश्रय स्थलों की भी हुई समीक्षा
बैठक के दौरान जिले में संचालित—
- गौशालाओं
- पशु आश्रय स्थलों
- पशु चिकित्सा सेवाओं
- निराश्रित पशुओं के प्रबंधन
- पशु कल्याण योजनाओं
की विस्तृत समीक्षा की गई और आवश्यक सुधारों के निर्देश दिए गए।

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