अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम लोगों की जेब पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े तनाव, ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताओं और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी के कारण भारत में थोक महंगाई के आंकड़ों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 9.87 प्रतिशत पहुंच गई। इससे पहले मई महीने में यह आंकड़ा 9.68 प्रतिशत था। कीमतों में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ईंधन, खाद्य पदार्थों, धातुओं और औद्योगिक उत्पादों की कीमतों में बदलाव के कारण हुई है।
वैश्विक तनाव का घरेलू बाजार पर असर
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजार पर देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव पेट्रोल, डीजल और परिवहन लागत पर पड़ता है। जब ईंधन महंगा होता है तो इसका असर सामान की ढुलाई से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों तक पहुंच जाता है।
महंगाई बढ़ने के प्रमुख कारण:
- कच्चे तेल की कीमतों में तेजी।
- अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव।
- खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि।
- धातु और औद्योगिक उत्पादों की लागत बढ़ना।
ईंधन और खाद्य वस्तुओं में बढ़ी महंगाई
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में ईंधन और बिजली क्षेत्र में थोक महंगाई दर 27.41 प्रतिशत रही। हालांकि मई में यह 30.33 प्रतिशत थी, लेकिन यह अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
वहीं खाद्य वस्तुओं में महंगाई दर बढ़कर 5.49 प्रतिशत पहुंच गई, जो मई में 3.60 प्रतिशत थी। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं के बजट पर पड़ सकता है।
अन्य क्षेत्रों की स्थिति:
- गैर-खाद्य वस्तुओं में थोक महंगाई: 11.07 प्रतिशत।
- खनिज श्रेणी में महंगाई: 9.45 प्रतिशत।
- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी कीमतों का दबाव देखने को मिला।
खुदरा महंगाई भी पहुंची 17 महीने के उच्च स्तर पर
थोक महंगाई के साथ खुदरा महंगाई में भी तेजी देखी गई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई जून 2026 में बढ़कर 4.38 प्रतिशत हो गई, जो पिछले 17 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है।
मई महीने में खुदरा महंगाई दर 3.93 प्रतिशत थी। नई बेस ईयर सीरीज के तहत पहली बार खुदरा महंगाई चार प्रतिशत के पार पहुंची है।
किन चीजों के दाम बढ़े?
जून महीने में कई वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- सोना, चांदी और कीमती धातुओं के आभूषण।
- टमाटर और अदरक।
- किशमिश और मुनक्का।
- कुछ औद्योगिक उत्पाद।
वहीं कुछ वस्तुओं में महंगाई अपेक्षाकृत कम रही:
- आलू।
- मटर।
- कार और जीप।
- जीरा।
- मोटरसाइकिल और स्कूटर।
RBI की बढ़ी चिंता, महंगाई अनुमान में बदलाव
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार महंगाई की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सरकार ने केंद्रीय बैंक को खुदरा महंगाई को चार प्रतिशत के आसपास बनाए रखने का लक्ष्य दिया है, जिसमें दो प्रतिशत तक उतार-चढ़ाव की अनुमति है।
हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा में RBI ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। हालांकि, चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई अनुमान को 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया गया है।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
अगर वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो इसका असर रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ सकता है। परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों और अन्य सामानों की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है।
आने वाले समय में महंगाई का रुख काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया की स्थिति किस दिशा में जाती है। फिलहाल बढ़ती थोक महंगाई ने अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं दोनों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।

More Stories
IND vs ZIM: ईशान किशन और तिलक वर्मा का तूफान, भारत ने जिम्बाब्वे के सामने रखा 220 रन का विशाल लक्ष्य
Gold Silver Update: सोना-चांदी में जोरदार उछाल, एक्सपर्ट ने दी चेतावनी- जल्दबाजी में निवेश किया तो हो सकता है नुकसान!
सरकार से समझौते के बाद खत्म हुआ CJP का आंदोलन! धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्रों ने लिया बड़ा फैसला