रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के धरसीवां क्षेत्र से एक बेहद दुखद हादसे की खबर सामने आई है। धरसीवां के कुंबरगढ़ स्थित प्राचीन चतुर्भुजी मंदिर परिसर में बनी एक पुरानी बावड़ी में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। पुलिस ने दोनों बच्चों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि मंदिर परिसर में स्थित यह प्राचीन बावड़ी काफी गहरी है। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बावड़ी के चारों ओर सुरक्षा जाली लगाने और आवश्यक इंतजाम करने की मांग की है।
कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के अनुसार, कुंबरगढ़ के प्राचीन चतुर्भुजी मंदिर परिसर में बच्चे रोजाना की तरह खेल रहे थे। खेलते-खेलते दो मासूम साक्षी साहू (7 वर्ष) और श्रवण धीवर (4 वर्ष) बावड़ी के पास पहुंच गए।
प्रत्यक्ष जानकारी के मुताबिक—
- खेलते समय दोनों बच्चे बावड़ी के पानी में उतर गए।
- बावड़ी में लगभग 25 से 30 फीट गहरा पानी था।
- गहराई अधिक होने के कारण दोनों बच्चे बाहर नहीं निकल सके।
- स्थानीय लोगों ने उन्हें निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
इस हादसे में दोनों मासूमों की मौत हो गई।
पूरे गांव में पसरा मातम
घटना की खबर मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बड़ी संख्या में ग्रामीण मंदिर परिसर और घटनास्थल पर पहुंच गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बावड़ी वर्षों पुरानी है और ऐतिहासिक महत्व रखती है। बुजुर्गों के अनुसार, राजा कुंबरसिंह के समय से यह बावड़ी अस्तित्व में है और पहले कभी इस तरह का हादसा नहीं हुआ था।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस दर्दनाक घटना के बाद लोगों ने मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें—
- बावड़ी के चारों ओर मजबूत लोहे की जाली लगाई जाए।
- चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।
- छोटे बच्चों के प्रवेश पर निगरानी रखी जाए।
- मंदिर परिसर में सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए जाएं।
लोगों का कहना है कि यदि पहले से सुरक्षा घेरा होता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
पुलिस ने क्या कहा?
धरसीवां थाना प्रभारी राजेंद्र दीवान ने बताया कि पुलिस ने पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के प्रयास किए जाएंगे।
सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा
विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात के मौसम में खुले कुएं, बावड़ियां, तालाब और जलाशय बच्चों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। ऐसे स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और अभिभावकों की सतर्कता बेहद आवश्यक है।
धरसीवां के कुंबरगढ़ में हुई यह दर्दनाक घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि ऐतिहासिक जलस्रोतों और खुले जलाशयों के आसपास सुरक्षा इंतजामों को प्राथमिकता देना कितना जरूरी है। दो मासूमों की असमय मौत ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है और अब स्थानीय लोग भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने की मांग कर रहे हैं।

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