July 29, 2026

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Bihan Yojana: ₹5 हजार के लोन से शुरू हुआ सफर, आज सालाना 4 लाख की कमाई कर रहीं सुनीता वर्मा; बनीं महिला सशक्तिकरण की मिसाल

छत्तीसगढ़ की बिहान योजना ने एक और महिला की जिंदगी बदल दी है। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के ग्राम टेकापारकला की रहने वाली सुनीता वर्मा आज आत्मनिर्भर महिला उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। कभी खेती और मजदूरी के सहारे परिवार चलाने वाली सुनीता ने महज ₹5 हजार के छोटे से ऋण से शुरुआत की थी, लेकिन आज उनकी सालाना आय लगभग ₹4 लाख तक पहुंच चुकी है।

उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, स्व-सहायता समूह का सहयोग और मेहनत के दम पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं।

स्व-सहायता समूह से बदली जिंदगी

सुनीता वर्मा वर्ष 2017 में पद्म मां गायत्री स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से मिले पहले ₹5 हजार के ऋण से उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और बैग सिलाई का काम शुरू किया।

इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। समय के साथ उन्होंने अपनी आजीविका के नए-नए स्रोत विकसित किए और एक सफल महिला उद्यमी बन गईं।

खेती और ट्रैक्टर से बढ़ी आमदनी

स्व-सहायता समूह के माध्यम से मिले ₹5 लाख के ऋण से सुनीता ने 48 डिसमिल कृषि भूमि और एक ट्रैक्टर खरीदा। बाद में ₹3 लाख के अतिरिक्त ऋण से ट्रॉली खरीदकर कृषि और परिवहन कार्य को और मजबूत किया।

आज वे लगभग 7 एकड़ भूमि पर धान, गेहूं, चना, अरहर, मूंग, उड़द और विभिन्न सब्जियों की खेती कर रही हैं।

कृषि कार्य से लागत निकालने के बाद उन्हें हर वर्ष लगभग ₹1.5 लाख की शुद्ध आय प्राप्त होती है।

मसाला निर्माण से बनाई नई पहचान

सुनीता केवल खेती तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने हल्दी, धनिया और मिर्च जैसी फसलों का उत्पादन कर स्वयं उनके मसाले तैयार करने शुरू किए।

वे तैयार करती हैं—

  • हल्दी पाउडर
  • धनिया पाउडर
  • मिर्च पाउडर
  • अचार
  • बड़ी
  • पापड़

इन उत्पादों की बिक्री सी-मार्ट, सरस मेला और विभिन्न ऑर्डर के माध्यम से की जाती है। इससे उन्हें हर वर्ष लगभग ₹1 लाख की अतिरिक्त शुद्ध आय होती है।

ई-रिक्शा और नर्सरी से बढ़ी कमाई

आय बढ़ाने के लिए सुनीता ने अन्य क्षेत्रों में भी कदम बढ़ाया।

उन्होंने—

  • पिछले तीन वर्षों से ई-रिक्शा संचालन शुरू किया।
  • वर्ष 2025 से सब्जी नर्सरी तैयार करने का कार्य भी प्रारंभ किया।

सब्जी नर्सरी से उन्हें हर साल लगभग ₹1 लाख की अतिरिक्त आय हो रही है।

खुद की दुकान और CSC सेंटर

आज सुनीता वर्मा का अपना पक्का मकान और दुकान है। यहां वे अपने स्वयं के बनाए मसाले और खाद्य उत्पाद बेचती हैं।

साथ ही वे कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) का संचालन भी कर रही हैं, जहां ग्रामीणों को विभिन्न डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इससे उनकी आय के साथ-साथ गांव के लोगों को भी सुविधा मिल रही है।

महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

सुनीता वर्मा की सफलता आज पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उनका मानना है कि यदि महिलाओं को सही अवसर, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिले तो वे अपने परिवार के साथ-साथ पूरे समाज की तस्वीर बदल सकती हैं।

भविष्य में वे पशुपालन व्यवसाय शुरू कर अपने उद्यम को और विस्तार देने की योजना बना रही हैं।