July 29, 2026

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Ram Mandir Donation Theft: दान की रकम रिश्तेदारों के खातों में घुमाकर रची गई करोड़ों की साजिश! SIT जांच में रोज हो रहे नए खुलासे

Ram Mandir Donation Theft

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की कथित चोरी के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने चोरी की रकम को सीधे अपने पास रखने के बजाय पहले रिश्तेदारों और करीबी लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर कराया, ताकि किसी को उन पर शक न हो। इसके बाद अलग-अलग तरीकों से पैसा वापस हासिल किया जाता था।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई सामान्य चोरी नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा एक सुनियोजित नेटवर्क था, जिसमें दान की रकम को व्यवस्थित तरीके से ठिकाने लगाया जाता था।

पूछताछ में आरोपियों ने क्या स्वीकार किया?

सूत्रों के अनुसार, मुख्य आरोपी अनुकूल मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि चोरी के पैसे को छिपाने के लिए उन्होंने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया।

जांच में सामने आई मुख्य बातें—

  • चोरी की रकम पहले करीबी लोगों के खातों में भेजी जाती थी।
  • बाद में अलग-अलग माध्यमों से नकदी वापस ली जाती थी।
  • बैंक रिकॉर्ड के जरिए कई लेन-देन की पुष्टि भी हुई है।
  • संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों के आधार पर कई खातों की जांच की गई।

30 बैंक खाते फ्रीज

SIT की कार्रवाई के तहत आरोपियों और उनके परिवार से जुड़े करीब 30 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इन खातों के जरिए चोरी की रकम को इधर-उधर किया गया।

बैंक लेन-देन की विस्तृत जांच के बाद पूरे नेटवर्क का वित्तीय रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।

कैसे होती थी दान की चोरी?

जांच में सामने आया है कि दान की गिनती के दौरान आरोपी सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों का फायदा उठाते थे।

आरोप है कि—

  • ₹500 के नोट मोजों, जेबों और कपड़ों के अंदर छिपाए जाते थे।
  • गिनती के दौरान निगरानी व्यवस्था की कमजोरियों का फायदा उठाया जाता था।
  • तलाशी प्रक्रिया में ढिलाई होने के कारण चोरी लंबे समय तक पकड़ी नहीं गई।
  • शुरुआत में छोटी रकम निकाली गई और बाद में चोरी का दायरा बढ़ता गया।

अब तक क्या-क्या बरामद हुआ?

पुलिस जांच के दौरान आरोपियों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है।

अब तक—

  • लगभग 79 लाख रुपये नकद बरामद किए जा चुके हैं।
  • बड़ी मात्रा में आभूषण और अन्य कीमती सामान भी जब्त किया गया है।
  • पूछताछ के आधार पर आगे और बरामदगी की संभावना जताई जा रही है।

अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार?

इस मामले में पुलिस ने अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है।

जांच में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें—

  • अविनाश शुक्ला
  • अनुकूल मिश्रा
  • लवकुश मिश्रा
  • करुणेश पांडे
  • रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू
  • सुभाष श्रीवास्तव

सहित अन्य संदिग्ध शामिल बताए जा रहे हैं।

SIT की जांच का दायरा बढ़ा

जांच एजेंसी अब केवल चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे दान प्रबंधन सिस्टम की भी समीक्षा कर रही है।

SIT इन बिंदुओं पर भी जांच कर रही है—

  • दान गिनने की पूरी प्रक्रिया।
  • सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था।
  • बैंकिंग प्रक्रिया और धन जमा करने का सिस्टम।
  • संबंधित कर्मचारियों की भूमिका।
  • क्या किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई?

जांच में बैंक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य दस्तावेजों का भी विश्लेषण किया जा रहा है।

बड़ा सवाल—क्या सुरक्षा व्यवस्था में थी बड़ी चूक?

इस पूरे मामले ने धार्मिक संस्थानों में दान प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में सुरक्षा संबंधी लापरवाही या किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक स्थलों पर दान प्रबंधन को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और बहुस्तरीय निगरानी प्रणाली से जोड़ना समय की आवश्यकता है।