दिल्ली हेल्थ सिस्टम में 600 करोड़ का कथित घोटाला, जांच से मचा हड़कंप
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग में करीब 600 करोड़ रुपये के कथित घोटाले ने प्रशासनिक हलकों में बड़ी हलचल मचा दी है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई में पूर्व वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है। मामला अस्पतालों के लिए की जाने वाली खरीद प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं से जुड़ा बताया जा रहा है।
अब तक कौन-कौन गिरफ्तार?
जांच एजेंसियों ने इस मामले में अब तक तीन गिरफ्तारियां की हैं:
- पूर्व DGHS डॉ. वत्सला अग्रवाल
- डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा
- CPA प्रमुख डॉ. विजय कुमार रंगा (पहले गिरफ्तार)
ACB का कहना है कि जांच अभी जारी है और कई और नाम सामने आ सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली सरकार के अस्पतालों में दवाइयों, उपकरणों और मेडिकल सामग्री की खरीद के लिए एक केंद्रीय एजेंसी काम करती है। आरोप है कि:
- टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई
- कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया
- सामान को कई गुना अधिक कीमत पर खरीदा गया
इसमें ORS, बेडशीट और मेडिकल मशीनों जैसी सामान्य चीजें भी शामिल हैं।
किन चीजों में हुआ कथित घोटाला?
जांच रिपोर्ट के अनुसार जिन वस्तुओं की खरीद पर सवाल उठे, उनमें शामिल हैं:
- ORS पैकेट
- अस्पताल की बेडशीट
- पोर्टेबल एक्स-रे मशीन
- C-Arm रेडियोलॉजिकल उपकरण
- एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन
- सर्जिकल सामग्री और दवाएं
कीमतों में कितना अंतर बताया गया?
प्रारंभिक जांच में सामने आए आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
- ORS की कीमत में लगभग 500% तक बढ़ोतरी
- बेडशीट 2-3 गुना महंगी खरीदी गई
- एक्स-रे मशीनों में 200% से अधिक अंतर
- कुछ उपकरणों में 300% से ज्यादा कीमत बढ़ोतरी
उदाहरण के तौर पर, ORS पैकेट जिसे बाजार में बेहद सस्ते दाम पर बताया जाता है, उसे कई गुना महंगे दाम पर खरीदे जाने का आरोप है।
कैसे हुआ कथित घोटाला?
जांच एजेंसियों के अनुसार, पूरा मामला टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर से जुड़ा है।
आरोपों के मुताबिक:
- ई-टेंडर में पारदर्शिता नहीं रखी गई
- शर्तें चुनिंदा कंपनियों के अनुसार तय की गईं
- लोकल सप्लायर सिस्टम का दुरुपयोग किया गया
- फर्जी या बढ़ी हुई कीमतों पर खरीद की गई
जांच एजेंसियां क्या कर रही हैं?
मामले में दो स्तर पर जांच चल रही है:
- ACB: भ्रष्टाचार, टेंडर हेरफेर और पद के दुरुपयोग की जांच
- ED: मनी लॉन्ड्रिंग और कथित काले धन की जांच
एजेंसियां खरीद दस्तावेज, भुगतान रिकॉर्ड और टेंडर फाइलों की जांच कर रही हैं।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार इस मामले में:
- और बड़े अधिकारियों की भूमिका सामने आ सकती है
- निजी कंपनियों की मिलीभगत उजागर हो सकती है
- सरकारी खरीद प्रणाली में बड़े सुधार की जरूरत सामने आ सकती है

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