July 1, 2026

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78 साल बाद भी सड़क-बिजली को तरसे 60 गांव! भूपेश बघेल से मिले ग्रामीण, अब विधानसभा में गूंजेगी जंगल के दर्द की आवाज

सीतानदी उदंती टाइगर रिजर्व

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व के भीतर बसे 60 से अधिक गांवों की समस्याएं अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों तक पहुंच गई हैं। वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के अभाव का सामना कर रहे ग्रामीणों ने अब अपनी आवाज बुलंद करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात की है।

जल, जंगल, जमीन संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर पहुंचकर वनांचल क्षेत्र की समस्याओं से जुड़ा विस्तृत ज्ञापन सौंपा और आरोप लगाया कि आजादी के 78 साल बाद भी इन गांवों में विकास की बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच सकी हैं।

किन समस्याओं को लेकर पहुंचे ग्रामीण?

समिति के सदस्यों ने बताया कि अभयारण्य क्षेत्र में रहने वाले हजारों लोगों को आज भी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने जिन प्रमुख समस्याओं को उठाया उनमें शामिल हैं:

गांवों तक पहुंचने के लिए पक्की सड़कों का अभाव
कई स्थानों पर पुल-पुलिया निर्माण अधूरा
नियमित बिजली आपूर्ति नहीं होना
पेयजल संकट और जल स्रोतों की कमी
स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव
सोलर लाइट लगाने की योजनाओं का लंबित होना
सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाना

ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकांश विकास कार्य वन विभाग की अनुमति और फॉरेस्ट क्लीयरेंस के नाम पर वर्षों से अटके हुए हैं।

आवास और आंगनबाड़ी योजनाएं भी प्रभावित

संघर्ष समिति का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले मकान, आंगनबाड़ी भवन और अन्य सार्वजनिक निर्माण कार्य भी मंजूरी के अभाव में शुरू नहीं हो पा रहे हैं।

इस कारण बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

जैतपुरी गांव की घटना ने बढ़ाई नाराजगी

प्रतिनिधिमंडल ने नगरी ब्लॉक के जैतपुरी गांव में हुई हालिया घटना को भी प्रमुखता से उठाया।

ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की कार्रवाई के दौरान महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य ग्रामीणों के साथ मारपीट की गई। पीड़ितों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, इन आरोपों पर वन विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

बोराई अस्पताल की स्थिति भी बनी चिंता

ग्रामीणों ने बोराई सिविल अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई।

उनके अनुसार:

अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी है।
कई जरूरी चिकित्सा उपकरण बंद पड़े हैं।
पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं।
गंभीर मरीजों को 80 किलोमीटर दूर धमतरी भेजना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण कई लोगों की जान भी जा चुकी है।

भूपेश बघेल ने दिया विधानसभा में मुद्दा उठाने का भरोसा

ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धमतरी कलेक्टर से फोन पर चर्चा कर मामले की जानकारी ली।

उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि:

आदिवासी अंचल की समस्याओं को विधानसभा में उठाया जाएगा।
जैतपुरी मामले में जवाब मांगा जाएगा।
बोराई अस्पताल की स्थिति पर सरकार से स्पष्टीकरण लिया जाएगा।
ग्रामीणों को अब समाधान की उम्मीद

जल, जंगल, जमीन संघर्ष समिति के साथ पहुंचे दर्जनों ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान अब तेजी से होगा।

अब सबकी नजर आगामी विधानसभा सत्र पर है, जहां वनांचल के 60 गांवों की आवाज सत्ता के गलियारों तक पहुंचने वाली है।