July 1, 2026

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महादेव ऐप की तर्ज पर देशभर में फैला ऑनलाइन सट्टे का जाल! 20 लाख में तैयार होता था बेटिंग ऐप, करोड़ों का खेल उजागर

महादेव सट्टा ऐप

छत्तीसगढ़ में चर्चित महादेव सट्टा ऐप मामले की जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसियों को ऐसे नेटवर्क की जानकारी मिली है, जो महादेव बुक के मॉडल पर आधारित निजी बेटिंग ऐप तैयार कर ऑनलाइन सट्टा कारोबार चला रहे थे। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए रोजाना लाखों रुपये का दांव लगाया जाता था और करोड़ों रुपये का लेन-देन किया जा रहा था।

पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी सकी दरडा उर्फ बाबू खेमानी समेत कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं था, बल्कि कई राज्यों तक फैला हुआ था।

कैसे काम करता था पूरा नेटवर्क?

जांच के अनुसार, आरोपी अपने लिए अलग-अलग ऑनलाइन बेटिंग ऐप तैयार करवाते थे और उन्हें संचालित करने के लिए अलग टीम बनाते थे।

नेटवर्क की कार्यप्रणाली में शामिल थे—

बेटिंग ऐप और पैनल का संचालन
अलग-अलग क्षेत्रों में स्टेशन और एजेंट नियुक्त करना
ग्राहकों से ऑनलाइन भुगतान लेना
रकम को विभिन्न खातों के जरिए ट्रांसफर करना
क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से पैसों को आगे भेजना

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा सिस्टम सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था।

20 लाख रुपये में तैयार होता था बेटिंग ऐप

पुलिस जांच में सामने आया है कि एक सामान्य ऑनलाइन बेटिंग ऐप तैयार करने में करीब 20 लाख रुपये तक खर्च होता था।

वहीं एडवांस सुविधाओं वाले प्लेटफॉर्म तैयार करने में खर्च और अधिक बढ़ जाता था। इनमें शामिल थे—

पॉइंट सिस्टम
एडमिन कंट्रोल पैनल
मल्टी यूजर एक्सेस
गेम और बेटिंग मैनेजमेंट सिस्टम
भुगतान और लेन-देन मॉड्यूल

ऐसे उन्नत प्लेटफॉर्म तैयार करने की लागत 50 लाख रुपये तक पहुंच जाती थी।

म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल कैसे होता था?

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी सीधे अपने बैंक खातों का उपयोग नहीं करते थे। इसके बजाय दूसरे लोगों के नाम पर खुले बैंक खातों का उपयोग किया जाता था।

इन्हें आम तौर पर “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है।

इन खातों का उपयोग—

पैसे जमा कराने,
रकम निकालने,
और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।

इससे वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करना कठिन हो जाता था।

क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होता था ट्रांजेक्शन

जांच एजेंसियों के अनुसार, बैंक खातों में जमा रकम को बाद में क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित किया जाता था।

विशेष रूप से USDT जैसी डिजिटल मुद्रा का उपयोग कथित तौर पर धन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जाता था। इसके बाद रकम विभिन्न डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर की जाती थी।

कई राज्यों तक फैला था नेटवर्क

चार्जशीट के अनुसार यह नेटवर्क केवल एक राज्य तक सीमित नहीं था।

जांच में जिन राज्यों का उल्लेख सामने आया उनमें शामिल हैं—

छत्तीसगढ़
झारखंड
महाराष्ट्र
गोवा
अन्य राज्य

बताया जा रहा है कि राज्य में 261 से अधिक लोग इस नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं, जबकि कई अन्य लोग अलग-अलग स्तर पर इसकी गतिविधियों में सहयोग कर रहे थे।

महादेव मॉडल से कितनी समानता?

जांच एजेंसियों का दावा है कि नए ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क की कार्यप्रणाली कथित महादेव मॉडल से काफी मिलती-जुलती है।

इसमें शामिल हैं—

ऑनलाइन बेटिंग ऐप,
एजेंट और पैनल सिस्टम,
बैंक खातों का उपयोग,
डिजिटल भुगतान,
और क्रिप्टोकरेंसी आधारित लेन-देन।

इसी वजह से जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की विस्तृत पड़ताल कर रही हैं।

FAQ
Q. महादेव सट्टा मामला क्या है?

A. यह कथित ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क से जुड़ा मामला है, जिसकी जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा रही है। जांच में अवैध ऑनलाइन सट्टा संचालन के आरोप शामिल हैं।

Q. म्यूल अकाउंट क्या होता है?

A. ऐसे बैंक खाते जिनका उपयोग किसी अन्य व्यक्ति या समूह द्वारा धन के लेन-देन के लिए किया जाता है, उन्हें म्यूल अकाउंट कहा जाता है।

Q. जांच में सबसे बड़ा खुलासा क्या हुआ?

A. जांच में निजी बेटिंग ऐप, म्यूल अकाउंट और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से धन के कथित ट्रांसफर की जानकारी सामने आई है।