रायपुर में हुए 10 लाख रुपये से अधिक की सनसनीखेज लूटकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि वारदात का मास्टरमाइंड कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि एमबीए की पढ़ाई कर चुका एक युवक है। ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे में लाखों रुपये गंवाने के बाद उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर लूट की पूरी साजिश रची और उसे अंजाम दिया।
पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी गौरव तिवारी ने जल्दी पैसा कमाने और सट्टे में हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए इस अपराध का रास्ता चुना। हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई और तकनीकी जांच के चलते आरोपी ज्यादा दिनों तक कानून से बच नहीं सके।
क्या है पूरा मामला?
6 जून को रायपुर के डंगनिया बाजार क्षेत्र में एक गैस एजेंसी के सुपरवाइजर से 10 लाख 26 हजार 500 रुपये की लूट हुई थी। सुपरवाइजर श्रवण साहू कंपनी के कॉर्पोरेट कार्यालय से नकदी लेकर निकले थे। इसी दौरान बदमाशों ने उनका पीछा किया और मौका मिलते ही नकदी से भरा बैग छीनकर फरार हो गए।
इस घटना ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए थे।
डेढ़ महीने तक की गई रेकी
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने वारदात को अंजाम देने से पहले करीब डेढ़ महीने तक रेकी की थी।
आरोपियों की योजना में शामिल था:
- कार्यालय की गतिविधियों पर नजर रखना
- नकदी ले जाने वाले कर्मचारियों की पहचान करना
- उनके आने-जाने के समय का अध्ययन करना
- सुरक्षित भागने का रास्ता तय करना
पुलिस के अनुसार, आरोपियों का कोई निश्चित शिकार नहीं था। वे केवल ऐसे व्यक्ति की तलाश में थे जो बड़ी रकम लेकर कार्यालय से बाहर निकले।
सट्टे में नुकसान बना अपराध की वजह
मुख्य आरोपी गौरव तिवारी पहले एक निजी कंपनी में भुगतान और लेन-देन के कार्यों से जुड़ा था। इसी दौरान उसे यह जानकारी मिली कि कई बार कर्मचारी लाखों रुपये नकद लेकर बाहर निकलते हैं।
ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे में भारी नुकसान झेलने के बाद उसने अपने चार दोस्तों के साथ मिलकर लूट की योजना बनाई। आसान और तेज कमाई के लालच ने उसे अपराध की दुनिया में धकेल दिया।
वारदात के बाद अलग-अलग राज्यों में भागे आरोपी
लूट के बाद पांचों आरोपियों ने रकम का बंटवारा किया और पुलिस से बचने के लिए अलग-अलग राज्यों में फरार हो गए।
फरारी के दौरान आरोपी पहुंचे:
- मध्य प्रदेश
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- दिल्ली
हालांकि वे लगातार एक-दूसरे के संपर्क में बने हुए थे, जिससे पुलिस को उनकी गतिविधियों का सुराग मिला।
72 घंटे के ऑपरेशन में पुलिस को मिली सफलता
घटना के बाद पुलिस आयुक्त के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा स्थानीय पुलिस ने मिलकर व्यापक जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने:
- हजारों सीसीटीवी फुटेज खंगाले
- तकनीकी विश्लेषण किया
- संदिग्धों की गतिविधियों को ट्रैक किया
- कई लोगों से पूछताछ की
लगातार 72 घंटे चले अभियान के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी गौरव तिवारी को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर उत्तर प्रदेश के भदोही से आशीष पाण्डेय उर्फ गोलू को भी पकड़ लिया गया।
बरामद हुई लाखों की रकम
गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने:
- 7 लाख रुपये नकद
- वारदात में इस्तेमाल की गई एक्टिवा
जब्त की है। बरामद संपत्ति की कुल कीमत लगभग साढ़े सात लाख रुपये बताई जा रही है।
अभी भी फरार हैं तीन आरोपी
पुलिस के अनुसार, इस लूटकांड में शामिल तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए विभिन्न राज्यों में लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही पूरे गिरोह को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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