June 10, 2026

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AIIMS भोपाल का मिशन ग्रीन इंडिया! 100 दिनों में 30,000 सीड बॉल बनाकर हरियाली की नई क्रांति

मध्य प्रदेश : पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत AIIMS भोपाल ने 100 दिनों का विशेष सीड बॉल अभियान शुरू किया है। यह अभियान 5 जून 2026 से 12 सितंबर 2026 तक चलाया जाएगा, जिसके दौरान संस्थान 30,000 सीड बॉल तैयार करने का लक्ष्य लेकर काम कर रहा है।

इस अभियान का उद्देश्य फैकल्टी मेंबर्स, स्टाफ और स्टूडेंट्स को पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल करना और एक हरित तथा अधिक सस्टेनेबल भविष्य की दिशा में योगदान देना है। AIIMS प्रशासन का मानना है कि इस तरह की भागीदारी से न केवल जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर पर्यावरण सुधार के प्रयास भी मजबूत होंगे।

अभियान के तहत प्रतिभागी मिट्टी, कम्पोस्ट और विभिन्न प्रकार के बीजों का उपयोग करके सीड बॉल तैयार करेंगे। इन सीड बॉल्स को बाद में उपयुक्त स्थानों पर बिखेरा जाएगा, ताकि उनमें से पौधे उग सकें और हरियाली को बढ़ावा मिले। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के सहयोग से इस पूरे अभियान को संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, अगले 100 दिनों में 30,000 सीड बॉल बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। इस प्रक्रिया में संस्थान के छात्र और कर्मचारी नियमित रूप से भाग लेंगे और हर दिन कुछ मात्रा में सीड बॉल तैयार की जाएंगी।

तैयार की गई सीड बॉल्स को भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में वितरित किया जाएगा। इनमें जंगल क्षेत्र, पार्क, सड़क किनारे और अन्य उपयुक्त स्थान शामिल हैं, जहां पौधों के प्राकृतिक रूप से विकसित होने की संभावना अधिक होती है। इस पहल से स्थानीय स्तर पर हरित आवरण बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

AIIMS प्रशासन का कहना है कि यह अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रयास है, बल्कि यह लोगों को प्रकृति से जोड़ने और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का भी माध्यम है। छात्रों के लिए यह एक सीखने का अवसर भी है, जिसमें वे व्यवहारिक रूप से पर्यावरण संरक्षण की प्रक्रिया को समझ सकेंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, सीड बॉल तकनीक कम लागत में अधिक हरियाली बढ़ाने का एक प्रभावी तरीका है। यह विशेष रूप से उन क्षेत्रों में उपयोगी है जहां पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करना कठिन होता है।

AIIMS भोपाल की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है, जो आने वाले समय में अन्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।