देशभर में जनजातीय विकास के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने एक बार फिर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। बैतूल जिले की एकीकृत जनजातीय विकास परियोजना (ITDP) भैंसदेही को जनजातीय क्षेत्रों में उत्कृष्ट विकास कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि न केवल बैतूल जिले बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है।
नई दिल्ली के प्रतिष्ठित विज्ञान भवन में आयोजित नेशनल कॉन्क्लेव-2026 के दौरान भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आईटीडीपी भैंसदेही को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। इस अवसर पर परियोजना को पांच लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी प्रदान की गई।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान
आईटीडीपी भैंसदेही को यह सम्मान जनजातीय क्षेत्रों में विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, सामाजिक सशक्तिकरण और स्थानीय समुदायों के जीवन स्तर में सुधार के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों के कारण मिला है।
यह पुरस्कार उन परियोजनाओं को दिया जाता है जिन्होंने जनजातीय समाज के विकास में उत्कृष्ट योगदान दिया हो और जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाए हों।
क्या है ITDP भैंसदेही?
आईटीडीपी (Integrated Tribal Development Project) का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समुदायों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास को गति देना है।
इस परियोजना के तहत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्य किया जाता है:
- शिक्षा सुविधाओं का विस्तार
- स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता
- रोजगार और स्वरोजगार के अवसर
- महिला सशक्तिकरण
- कौशल विकास कार्यक्रम
- बुनियादी सुविधाओं का विकास
- जनजातीय संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण
भैंसदेही क्षेत्र में इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।
क्यों मिला यह सम्मान?
विशेषज्ञों के अनुसार आईटीडीपी भैंसदेही ने जनजातीय क्षेत्रों में विकास योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाया।
परियोजना की प्रमुख उपलब्धियां:
- दूरस्थ गांवों तक विकास योजनाओं की पहुंच
- शिक्षा के प्रति जागरूकता में वृद्धि
- महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना
- युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम
- स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार
- आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा
इन प्रयासों ने क्षेत्र के हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिलना बड़ी उपलब्धि
विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित किया जाना किसी भी संस्था के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि भैंसदेही परियोजना ने राष्ट्रीय मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरी है।
जनजातीय विकास में नई उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सम्मान न केवल संस्थाओं का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्यों को और अधिक गति देने का काम भी करते हैं।
आईटीडीपी भैंसदेही की सफलता यह साबित करती है कि सही योजना, मजबूत क्रियान्वयन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से दूरस्थ क्षेत्रों में भी बड़े बदलाव संभव हैं।
मध्यप्रदेश के लिए गर्व का क्षण
राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस उपलब्धि ने मध्यप्रदेश को जनजातीय विकास के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है। यह सम्मान उन सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है जिन्होंने जनजातीय समाज के उत्थान के लिए लगातार काम किया।
आने वाले समय में आईटीडीपी भैंसदेही की यह सफलता देश के अन्य जनजातीय क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बनेगी और समावेशी विकास के नए आयाम स्थापित करेगी।

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