अमेरिका ने भारत समेत दुनिया के कई बड़े ट्रेडिंग पार्टनर देशों के लिए नया टैरिफ प्रस्तावित किया है। इस बार बहाना है जबरन श्रम (बांधुआ मजदूरी)। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के अनुसार भारत से आने वाले उत्पादों पर 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।
नया टैरिफ क्यों और किसके लिए?
अमेरिका का कहना है कि कई देशों ने अपने यहां जबरन मजदूरी पर नियंत्रण नहीं रखा है। अमेरिकी अधिकारी इसे घरेलू मजदूरों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा मानते हैं।
अमेरिका के प्रस्तावित टैरिफ दरें:
देश/क्षेत्र प्रस्तावित टैरिफ
भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, स्विट्जरलैंड 12.5%
कनाडा, मैक्सिको, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, ताइवान न्यूनतम 10%
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर का कहना है कि यह कदम वैश्विक ट्रेड में जबरन श्रम को बढ़ावा देने से रोकने के लिए है।
भारत पर संभावित असर
यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा कठिन हो सकती है। खासकर ये सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं:
इंजीनियरिंग सामान
टेक्सटाइल और वस्त्र उद्योग
रसायन और फार्मा उद्योग
अन्य निर्यात-उन्मुख उद्योग
यह अभी सिर्फ प्रस्ताव है, अंतिम निर्णय सार्वजनिक सुझाव और सुनवाई के बाद होगा।
आगे की प्रक्रिया
6 जुलाई: अमेरिकी प्रशासन ने लिखित सुझाव मांगे हैं।
7 जुलाई: सेक्शन 301 पैनल की सार्वजनिक सुनवाई शुरू होगी।
सुनवाई के आधार पर अंतिम कार्रवाई तय की जाएगी।
ट्रंप का नया पैंतरा
पिछले टैरिफ प्रयासों पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। अब ट्रंप प्रशासन सेक्शन 301 जांच के तहत नया रास्ता अपना रहा है, जिसे कानूनी रूप से मजबूत माना जाता है। फिलहाल सेक्शन 122 के तहत 10% अस्थायी वैश्विक शुल्क लागू है, जिसकी अवधि जुलाई में समाप्त होने वाली है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों के अनुसार यदि नया टैरिफ लागू होता है, तो अमेरिका और प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है। हालांकि अधिकांश देशों ने बजाए जवाबी कार्रवाई के, बातचीत और ट्रेड डील से समाधान तलाशने की रणनीति अपनाई है।

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