रोजगारोन्मुखी शिक्षा
नई दिल्ली/रायपुर। सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ पर गठित संसद की संयुक्त समिति की बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक में उन्होंने देश की शिक्षा नीति को और प्रभावी बनाने के लिए कई व्यावहारिक और महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
बैठक में देश के उच्च शिक्षा और तकनीकी संस्थानों के प्रमुखों ने भी हिस्सा लिया। इसमें IIT मुंबई, IITDM कांचीपुरम, सास्त्रा विश्वविद्यालय, शिव नादर विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, IIFT और IIMC जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के कुलपतियों और विशेषज्ञों ने विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।
बृजमोहन अग्रवाल के सुझाव
सांसद अग्रवाल ने बैठक में शिक्षा के क्षेत्र में तीन मुख्य बातों पर जोर दिया:
- रोजगारोन्मुखी शिक्षा: युवाओं को आत्मनिर्भर और हुनरमंद बनाने के लिए शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़ना आवश्यक है।
- शोध आधारित प्रणाली: उच्च शिक्षा में शोध और नवाचार को प्राथमिकता देने से देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
- भारतीय मूल्यों का समावेश: आधुनिक शिक्षा वैश्विक मानकों के अनुरूप हो, लेकिन इसमें हमारी सांस्कृतिक जड़ों और नैतिक मूल्यों को भी शामिल किया जाए।
अग्रवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को पूरा करने में शिक्षा नीति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इस बैठक का उद्देश्य शिक्षा को युवाओं के लिए अधिक प्रभावी, समावेशी और भविष्योन्मुखी बनाना है।”
शिक्षा विधेयक पर विशेषज्ञों की भूमिका
सभी विशेषज्ञों के सुझावों को विधेयक के अंतिम प्रारूप में शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया गया। इस प्रक्रिया से देश को ऐसा शिक्षा कानून मिलेगा, जो:
- युवा वर्ग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए।
- शिक्षा प्रणाली में नवाचार और शोध को प्राथमिकता दे।
- भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का सम्मान करे।

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