भोपाल और जबलपुर जेल में आत्महत्याओं से हड़कंप, प्रशासन की जांच शुरू
भोपाल/जबलपुर, मध्य प्रदेश – भोपाल और जबलपुर की सेंट्रल जेलों में दो अलग-अलग घटनाओं में कैदियों ने आत्महत्या कर ली, जिससे जेल प्रशासन पर सवाल खड़े हो गए हैं। इन घटनाओं ने जेलों में सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर चिंता उत्पन्न कर दी है।
भोपाल सेंट्रल जेल में आत्महत्या
पहला मामला भोपाल सेंट्रल जेल का है, जहां गुड्डू आदिवासी नामक बंदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था और जेल की गौशाला में गौसेवक के रूप में कार्य कर रहा था। घटना के समय उसने गौशाला में एक पेड़ से फांसी का फंदा बना लिया और आत्महत्या कर ली। घटना के बाद उसका शव गांधी मेडिकल कॉलेज की मर्चुरी में भेज दिया गया, और पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
जबलपुर सेंट्रल जेल में दूसरी आत्महत्या
दूसरी घटना जबलपुर की नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल की है, जहां एक विचाराधीन बंदी गुड्डू उर्फ राजा विश्वकर्मा ने तौलिये से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह जेल के अस्पताल वार्ड के शौचालय में मृत पाया गया। बताया जा रहा है कि वह कई बीमारियों से भी पीड़ित था और 2024 से जेल में बंद था। आत्महत्या के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है, लेकिन अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जेल प्रशासन पर सवाल
इन दोनों घटनाओं के बाद जेल प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं। जेल में बंद कैदियों की मानसिक स्थिति और सुरक्षा के बारे में सवाल खड़े हो रहे हैं, खासकर ऐसे मामलों में जब विचाराधीन बंदी या सजायाफ्ता कैदी आत्महत्या कर लेते हैं।
जांच की प्रक्रिया
जेल प्रशासन ने दोनों मामलों में संबंधित थानों को सूचित कर दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वे आत्महत्या के कारणों की गहन जांच करेंगे, और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, यदि किसी लापरवाही का पता चलता है।

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