April 15, 2026

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छत्तीसगढ़ में 536 करोड़ पर बड़ा सवाल: जल जीवन मिशन की फंडिंग पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा पूरा हिसाब


छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। राज्य में पेयजल संकट और अधूरे कार्यों की लगातार मिल रही शिकायतों के बीच हाईकोर्ट ने सरकार से 536 करोड़ रुपये के उपयोग पर विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने साफ कहा है कि जनता के पैसों का इस्तेमाल पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए।

यह मामला अब केवल एक योजना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रदेश में विकास कार्यों की गुणवत्ता और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।


⚖️ हाईकोर्ट की सख्ती और बड़ा आदेश

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से पूछा है कि केंद्र से मिले करोड़ों रुपये आखिर किन-किन परियोजनाओं में खर्च किए गए या किए जा रहे हैं।

कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि एक विस्तृत शपथ-पत्र (Affidavit) दाखिल किया जाए, जिसमें पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से दी जाए।


💰 536 करोड़ रुपये को लेकर सवाल

केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए छत्तीसगढ़ को लगभग 536.53 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इस राशि को जल जीवन मिशन के तहत पेयजल आपूर्ति और बुनियादी ढांचे के विकास में खर्च किया जाना है।

लेकिन अदालत ने यह स्पष्ट किया कि केवल फंड जारी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही उपयोग और प्रगति रिपोर्ट भी जरूरी है।


🚰 किन जिलों में उठे सवाल?

रिपोर्टों के अनुसार राज्य के कई जिलों में अभी भी स्थिति संतोषजनक नहीं है, जैसे:

  • रायगढ़
  • दुर्ग
  • बस्तर
  • अंबिकापुर

इन इलाकों में पाइपलाइन और बुनियादी ढांचा बनने के बावजूद कई जगहों पर नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है।


📌 मुख्य मुद्दे जो सामने आए

हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदु उभरकर सामने आए:

  • कई क्षेत्रों में कार्य अधूरे पड़े हैं
  • पाइपलाइन बिछाने के बाद भी पानी की सप्लाई नियमित नहीं
  • फंड के उपयोग में पारदर्शिता को लेकर सवाल
  • परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति रिपोर्ट का अभाव

🏛️ केंद्र सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि:

  • जल जीवन मिशन की समयसीमा अब दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी गई है
  • दूसरे चरण में नई वित्तीय व्यवस्था लागू की गई है
  • राज्यों को समय-समय पर फंड जारी किया जा रहा है

⚠️ क्यों बढ़ा मामला गंभीर?

यह मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि:

  • यह सीधे जनता के पीने के पानी से जुड़ा है
  • करोड़ों रुपये के खर्च के बावजूद जमीनी स्थिति कमजोर दिख रही है
  • सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं

📅 अगली सुनवाई कब?

हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 7 मई को तय की है। उस दिन राज्य सरकार को पूरा जवाब और फंड उपयोग का विस्तृत ब्यौरा पेश करना होगा।