May 5, 2026

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भागीरथपुरा दूषित पानी कांड: न्यायिक आयोग ने रिपोर्ट पेश नहीं की, हाई कोर्ट ने 22 अप्रैल तक का दिया वक्त

इंदौर, छत्तीसगढ़: भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में पिछले एक महीने से न्यायिक आयोग द्वारा रिपोर्ट पेश करने का मामला गंभीर रूप से लंबित है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अपनी नाराजगी जताते हुए आयोग से पूछा कि एक माह का अतिरिक्त समय और सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद रिपोर्ट क्यों पेश नहीं की गई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग को 22 अप्रैल तक रिपोर्ट पेश करने का अंतिम समय दिया है।

न्यायिक आयोग और रिपोर्ट की देरी

  • हाई कोर्ट ने एक माह पहले ही न्यायिक आयोग को भागीरथपुरा मामले की जांच पूरी करने के लिए समय दिया था। लेकिन आयोग रिपोर्ट पेश नहीं कर सका, जिससे कोर्ट ने अपनी नाराजगी व्यक्त की।
  • पिछली सुनवाई में, आयोग ने अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिसमें बताया गया था कि नगर निगम द्वारा सभी दस्तावेज़ समय पर नहीं दिए गए थे, जिसके कारण अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचना संभव नहीं हो पाया था।
  • नगर निगम ने इस बार सभी दस्तावेज आयोग को उपलब्ध कराए, और कोर्ट ने इसे स्वीकार किया। अब, आयोग को 22 अप्रैल तक जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है।

कोर्ट की चिंताएँ और दिशा-निर्देश

  • सांई कृपा कॉलोनी में दूषित पानी की समस्या को लेकर भी कोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान अजय बागडिया ने सांई कृपा कॉलोनी में नलकूप से दूषित पानी मिलने की बात उठाई, जिस पर कोर्ट ने कहा, “हम नहीं चाहते कि शहर में कहीं कोई दूसरा भागीरथपुरा कांड हो।”
  • नगर निगम को आदेश दिया गया कि सांई कृपा कॉलोनी में नलकूपों के पानी की सतत जांच की जाए और सतर्कता बरतनी चाहिए।

भागीरथपुरा कांड और इसकी गंभीरता

  • भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से 36 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में हाई कोर्ट में पांच अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हो रही है।
  • कोर्ट ने इस मामले में एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया था, जो निगम द्वारा दूषित पानी आपूर्ति और अन्य समस्याओं की जांच करेगा।
  • कोर्ट ने निगम से कहा था कि सभी दस्तावेज आयोग को उपलब्ध कराए जाएं, जो अब किए गए हैं।

निशुल्क पानी की समस्या

  • एडवोकेट मोहन सिंह चंदेल ने कोर्ट में कहा कि कोर्ट के आदेश के बावजूद भागीरथपुरा के रहवासियों को निशुल्क पानी नहीं मिल रहा है, और उन्हें पानी के लिए पैसे चुकाने पड़ रहे हैं।
  • कोर्ट ने इस पर आदेश देते हुए कहा कि जो भी शिकायत हो, वह शपथ पत्र के जरिए आयोग के सामने रखी जाए।