April 1, 2026

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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: घर में प्रार्थना सभा पर पुलिस की रोक अवैध, नागरिक अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं!


छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: घर में प्रार्थना सभा करने की आज़ादी

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और बहस योग्य फैसला सुनाया है, जिसमें अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यदि कोई कानून का उल्लंघन नहीं हो रहा है, तो किसी व्यक्ति को अपने घर में प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए पुलिस से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। यह फैसला जांजगीर-चांपा जिले के गोधना गांव के दो रिश्तेदारों द्वारा दायर की गई याचिका पर आधारित है, जिन्होंने पुलिस द्वारा प्रार्थना सभा आयोजित करने पर रोक लगाए जाने का विरोध किया था।

क्या था मामला?

दो याचिकाकर्ता, जो गोधना गांव के निवासी हैं, ने बताया कि वे साल 2016 से अपने घर की पहली मंजिल पर एक हॉल में प्रार्थना सभा आयोजित कर रहे थे। इस सभा में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि या गड़बड़ी नहीं होती थी। बावजूद इसके, पुलिस ने उन्हें बार-बार ऐसी सभा आयोजित करने से रोका और इसके लिए तीन नोटिस जारी किए।

नोटिस जारी किए गए:

  • 18 अक्टूबर 2025
  • 22 नवंबर 2025
  • 1 फरवरी 2026

इन नोटिसों में पुलिस ने याचिकाकर्ताओं से यह कहा था कि उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 94 के तहत अनुमति लेनी होगी।

ग्राम पंचायत से NOC वापस लेना

आगे की सुनवाई में याचिकाकर्ताओं ने बताया कि शुरू में उन्हें प्रार्थना सभा के लिए ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त हुआ था, लेकिन बाद में पंचायत ने दबाव में आकर यह प्रमाणपत्र वापस ले लिया।

सरकारी वकील का तर्क:

याचिकाकर्ताओं के खिलाफ सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने दावा किया कि याचिकाकर्ताओं का आपराधिक इतिहास है और उनके खिलाफ पूर्व में कई आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। इसके आधार पर उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं को पूर्व अनुमति नहीं मिली थी, इसलिए पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी।

हाई कोर्ट का फैसला:

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सरकारी वकील की दलील को खारिज करते हुए यह कहा कि यदि किसी कानून का उल्लंघन नहीं हो रहा है, तो किसी व्यक्ति को अपने घर में प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा,
“याचिकाकर्ता उस भूमि के पंजीकृत मालिक हैं और 2016 से वहां प्रार्थना सभा आयोजित कर रहे हैं। ऐसा कोई कानून नहीं है जो किसी व्यक्ति को अपने घर में प्रार्थना सभा आयोजित करने से रोकता हो।”

अदालत का कड़ा संदेश पुलिस को

इसके अलावा, कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को भी सख्त निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं के नागरिक अधिकारों में हस्तक्षेप न करें और पूछताछ की आड़ में उन्हें परेशान न करें। अदालत ने यह भी कहा कि अगर किसी मामले में कानून-व्यवस्था या ध्वनि प्रदूषण जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं, तो पुलिस संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकती है, लेकिन बिना किसी ठोस आधार के हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

फैसले के अहम बिंदु:

  • कानूनी उल्लंघन नहीं होने पर अनुमति की आवश्यकता नहीं
  • सार्वजनिक या निजी आयोजनों पर हस्तक्षेप केवल कानून के उल्लंघन के आधार पर किया जा सकता है
  • पुलिस को नागरिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं
  • प्रार्थना सभा पर रोक अवैध, कोर्ट ने नोटिस को रद्द किया

क्या यह फैसला देशभर में असर डालेगा?

यह फैसला न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश में धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि जब तक कोई कानून का उल्लंघन नहीं हो रहा, तब तक किसी भी व्यक्ति को अपने घर में धार्मिक गतिविधियाँ करने से रोका नहीं जा सकता। इस फैसले से उन लोगों को राहत मिल सकती है, जो बिना किसी अवैध गतिविधि के अपने घरों में धार्मिक आयोजनों का आयोजन करते हैं।