जांजगीर-चांपा जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी श्री जन्मेजय महोबे ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय के प्रतिवेदन पर जिले के एक अपराधी सांतनु साण्डे को जिला बदर कर दिया गया है। यह आदेश जिले और आसपास के जिलों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जारी किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
- कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे ने छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 3 और 5 के तहत यह आदेश जारी किया।
- सांतनु साण्डे, जो बिरगहनी, थाना-बलौदा का निवासी है, को जांजगीर-चांपा जिले सहित सरहदी जिलों – सक्ती, रायगढ़, कोरबा, बिलासपुर, और बालौदा बाजार जिलों की राजस्व सीमाओं से बाहर जाने के लिए कहा गया है।
- सांतनु साण्डे को 24 घंटे के भीतर इन जिलों से बाहर जाना होगा और अगले 1 वर्ष तक इन जिलों में प्रवेश करने पर प्रतिबंध रहेगा।
जिला बदर का क्या मतलब होता है?
जिला बदर एक कानूनी प्रक्रिया है जिसमें अपराधियों या विध्वंसक तत्वों को किसी विशिष्ट क्षेत्र से बाहर कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया के तहत, एक व्यक्ति को एक निश्चित समय तक उस क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होती है, ताकि शांति और व्यवस्था बनाए रखी जा सके।
सांतनु साण्डे का आपराधिक इतिहास
- सांतनु साण्डे के खिलाफ पुलिस द्वारा कई अपराधों की रिपोर्ट की गई है, जिनमें गंभीर आरोप शामिल हैं।
- वह जिले के विभिन्न इलाकों में अपराधों में शामिल था, जिससे स्थानीय जनता में भय और असुरक्षा का माहौल था।
- पुलिस ने उसकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी थी, और जब उसकी गतिविधियों से कानून व्यवस्था में खलल डालने का खतरा महसूस हुआ, तब पुलिस अधीक्षक ने जिला बदर की सिफारिश की।
कलेक्टर का बयान
कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे ने कहा, “हमारे मुख्य उद्देश्य जिले में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना है। इस आदेश से यह सुनिश्चित होगा कि समाज में असामाजिक तत्वों का प्रभाव कम हो और नागरिकों को सुरक्षा मिले। यह कदम उस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।”
पुलिस की कड़ी कार्रवाई
- पुलिस प्रशासन ने सांतनु साण्डे के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उसे जिले से बाहर करने का आदेश दिया।
- इस फैसले के बाद जिले में कानून व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा और अपराधियों को कड़ा संदेश जाएगा कि अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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