मध्य प्रदेश में सहारा इंडिया के निवेशकों से जुड़ी धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश सरकार को इस संबंध में लगभग 9 लाख शिकायती आवेदन मिले हैं जिनमें कुल 6,689 करोड़ रुपये के गबन की बात सामने आई है। यह जानकारी खुद मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा में दी है। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बने रिफंड पोर्टल के जरिए अब तक छोटे निवेशकों को 355 करोड़ रुपये लौटाए जा चुके हैं।
विधानसभा में सरकार बोली- 6,689 करोड़ का गबन
विधानसभा में बुधवार को राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से गृह विभाग से जुड़ी यह जानकारी दी। कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह के सवाल का जवाब में उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में सहारा समूह के खिलाफ राज्य सरकार को लगभग 9 लाख से अधिक शिकायती आवेदन मिले। इसमें कुल लगभग 6,689 करोड़ रुपए की राशि के गबन का मामला सामने आया है।
निवेशकों को लौटाए 355 करोड़
राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने विधानसभा में जानकारी देते हुए कहा कि सहारा समूह के मध्य प्रदेश के निवेशकों से जुड़े कुल 9 लाख 6 हजार 661 आवेदन सामने आए हैं। इसमें से लगभग 7.5 लाख निवेशकों के शिकायती आवेदनों का निराकरण सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हो गया है। इसमें कुल राशि रुपए 6 हजार 6 सौ 89 करोड़ निवेशकों की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत सहारा रिफंड पोर्टल बनाया गया है। इस पोर्टल के जरिए 355 करोड़ रुपए की राशि निवेशकों को लौटाई जा चुकी है।
मुरैना कोतवाली में मर्ज की गई सारी एफआईआर
राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बताया कि एक जनवरी 2024 के बाद से समूह के खिलाफ 4 एफआईआर दर्ज हुई हैं। इसके अलावा भी जितनी एफआईआर दर्ज की गई हैं, उनको मुरैना कोतवाली में मर्ज करके आगे की कार्रवाई की जा रही है। सरकार का जवाब आने से पहले कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने बताया था कि पूरे मध्य प्रदेश में इस प्रकार की 123 एफआईआर दर्ज हैं।
सरकार से पूछे थे ये सवाल?
कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने सरकार से पूछा था कि सहारा समूह की राज्य में कितनी संपत्ति है? उन्होंने यह भी जानना चाहा था कि क्या इस संपत्ति की नीलामी के माध्यम से निवेशकों की राशि लौटाने की सरकार की कोई योजना है? इस पर राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के तत्वावधान में रिफंड की सारी कार्यवाही चल रही है। समूह की अनेक संपत्तियां न्यायालय के आदेश पर अटैच भी की गई हैं। यह अब राज्य पुलिस की सीमा से बाहर का विषय है।

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