बिलासपुर / छत्तीसगढ़ शासन केंद्र सरकार गरीबों को मुफ्त चावल और सस्ती दर पर खाद्यात्र उपलब्ध कराने की योजना पर बिलासपुर जिले में सरकारी चावल की कालाबाजारी चरम पर है। खाद्य विभाग के अधिकारियों की मेरहबानी के चलते खुलेआम चावल के बदले नगद पैसा देने के वीडियो सामने आ रहे है उसके बाद भी खाद्य विभाग के संरक्षण में सरकारी चावल की मुनाफाखोरी और कालाबाजारी का खेल खूब फल फूल रहा है। जिले में भौतिक सत्यापन के बदले घोषणा पत्र का खेल खेला जा रहा है जिसके चलते कई उचित मूल्य दुकान संचालक स्टॉक रिकॉर्ड दुरुस्त करने के नाम पर अनाज की अफरातफरी में जुटे हैं। आरोप है कि खाद्यात्र बांटने के बजाय हितग्राहियों को पैसा देकर चावल बाजार में खपाया जा रहा है। वार्ड 30 गोडपारा स्थित मां शेरावाली साख सहकारी समिति का एक और वीडियो सामने आया है जिसमें दुकानदार हितग्राही को अनाज के बदले नगद पैसा देते हुए दूसरी बार कैमरे में कैद हुआ है। इससे पहले भी इस दुकान का संचालक 4 मई 2025 को अनाज के बदले नकद देते हुए वीडियो में कैद हुआ था। शिकायतों के बावजूद विभागीय चुप्पी सवाल खड़े कर रही है
राशन घोटाले के लगातार आरोप- सरकारी अनाज के बदले नगद का वीडियो वायरल, कार्रवाई पर उठे सवाल
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीब परिवारों को सस्ती दरों पर खाद्यान्त्र उपलब्ध कराने की योजना पर जिले में फिर सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि वार्ड 30, मुत्रूलाल शुक्ल गोंडपारा स्थित श्री शक्ति प्राथमिक उपभोक्ता दुकान के संचालक का तीसरी बार वीडियो सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर राशन के बदले नगद राशि देते दिखाया गया है। इससे पहले 12 मई 2025 को भी इसी दुकान से जुड़ा एक वीडियो वायरल हुआ था। और अब ताजा मामला का वीडियो एक बार फिर सामने आया है जिसमें साफ साफ देखा जा सकता है कि बिना डर और भय के यह खुलेआम नगद पैसा देते हुए दिखाई दे रहा है। सूत्रों का दावा है कि यह दुकान संचालक ने किराए में दे रखी है जिसके चलते बार बार इस तरह के दुकान के पोल खोलने वाले वीडियो सामने आ रहे है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि कई दुकानों में हितग्राहियों को अनाज देने के बजाय नकद भुगतान कर सरकारी चावल खुले बाजार में बेचे जाने की शिकायतें मिल रही हैं। राशन विक्रेता संघ के अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय सहित कुछ अन्य नामों को लेकर भी पूर्व में शिकायतें और जांच रिपोर्ट की अनुशंसा होने की बात कही जा रही है, हालांकि अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होने से कार्रवाई पर प्रश्न उठ रहे हैं। सूत्र दावा करते है कि जिले में सरकारी अनाज के लिए विक्रेता संघ अध्यक्ष ऋषि उपाध्याय ने एक सिंडिकेट बना के रखा हुआ है। जिसके चलते जिले में चावल की कालाबाजारी और मुनाफाखोरी का खेल चल रहा है।
खाद्य विभाग खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर इस मामले में मीडिया को जानकारी देने से बचते नजर आते है। इतना ही नहीं खाद्य नियंत्रक ने इस मामले में ऋषि उपाध्याय के खिलाफ की जांच रिपोर्ट की फाइल भी दबा कर बैठे हुए है, जांच रिपोर्ट में पुख्ता आरोप सिद्ध होने के बाद भी कालाबाजारीयो को संरक्षण देने का काम कर रहे है। लगातार वीडियो सामने आने के बाद भी कार्यवाही नहीं करने के कारण खाद्य विभाग के अधिकारी संदेह के घेरे में है ??

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