June 27, 2026

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रायगढ़ में फर्जी रकबा घोटाला: अपेक्स बैंक के पूर्व बीएम को बचाने का आरोप, जांच में खुलासा

रायगढ़। अपेक्स बैंक की शाखाओं में जिस तरह की अंधेरगर्दी चल रही है, उससे एक दिन बैंक का डूबना तय है, जो ब्रांच मैनेजर फर्जी रकबा और लिमिट से अधिक कैश ट्रांजेक्शन को अनुमति देता है, उसको मुख्यालय वाले बचा लेते हैं ताकि आगे जाकर वह इससे भी बड़ा कांड करे। लैलूंगा और बीरसिंघा के मामले में ऐसा ही कारनामा किया गया था जिसे दबा दिया गया।  लैलूंगा के आधा दर्जन उपार्जन केंद्रों में फर्जी रकबा बढ़ाकर हुई खरीदी में प्रबंधक समेत कुछ कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इस घोटाले में बराबर रूप से शामिल अपेक्स बैंक पत्थलगांव के शाखा प्रबंधक भी लपेटे में आ गए थे।

उनके खिलाफ अपेक्स बैंक के एमडी ने भी जांच का आदेश दिया था लेकिन वह कहीं दबा दी गई। अपेक्स बैंक की नींव को कमजोर करने में मुख्यालय ही लगा हुआ है। ऐसे कई घोटाले हैं जिनमें ब्रांच मैनेजर की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई। लैलूंगा, राजपुर और बीरसिंघा में किसानों के रकबे में बोगस बढ़ोतरी कर धान की खरीदी की गई। जिन किसानों के पास दो एकड़ जमीन थी, उनसे 12 एकड़ में खरीदी की गई। किसानों के रकबा बढ़ाने, खसरा नंबर बदलने, एकाउंट नंबर और आधार नंबर बदलने का भी खुलासा हुआ था। इस मामले में तत्कालीन समिति प्रबंधक प्रहलाद बेहरा और त्रिलोचन बेहरा

समेत फड़ प्रभारी, कंप्यूटर ऑपरेटर, लिपिक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई थी। घोटाले में अपेक्स बैंक पत्थलगांव के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर रामकुमार यादव की भूमिका भी सामने आई है। रायगढ़ से जांच प्रतिवेदन बनाकर एमडी अपेक्स बैंक को भेजा गया था। एमडी केएन कान्डे ने रामकुमार यादव के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। बैंकिंग नियमों के विरुद्ध काम किए गए। घोटाले के बाद उन किसानों के एकाउंट से रुपए आहरण करने के लिए सारे नियम तोड़े गए, लेकिन जांच रिपोर्ट ही दबा दी गई और बीएम को बरी कर दिया गया।

सेल्फ चैक, दूसरे खातों में मनी ट्रांसफर

बीएम रामकुमार यादव ने लैलूंगा, बीरसिंघा और राजपुर के किसानों को सेल्फ चैक से रकम आहरण करने दिया। उनके एकाउंट से दूसरे खाते में रकम ट्रांसफर की गई। रकम आहरण के लिए 50 हजार रुपए की लिमिट तय है लेकिन यादव ने मनमानी राशि भुगतान की। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि भुगतान में बैंकिंग नियमों का पालन नहीं किया गया। बिचौलियों से सांठगांठ की गई। कलेक्टर ने जांच प्रतिवेदन एमडी को भेजा था। इस तरह के मामले ही धान खरीदी प्रक्रिया में घपलेबाजी को बढ़ावा दे रहे हैं।