जनपद पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार को रोकने सक्रिय नहीं उच्च अधिकारी
शिकायतों पर उल्टा मामले को दबाने का किया जा रहा दबाव
महासमुंद – सरायपाली – रोहिना :
मनरेगा के तहत ग्रामीणों की सुविधाओं के लिए बनाई गई सड़कें भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती जा रही हैं।
ताज़ा मामला “ग्राम पंचायत रोहिना” का है, जहां वर्ष 2023 में करीब 19 लाख रुपये की लागत से बनी ‘अमर घर से मालिक राम के खेत तक’ डब्ल्यू बी एम सड़क महज 1.5वर्ष में ही जर्जर होकर टूटने लगी।
सड़क की हालत देखकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।

सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर मार्ग उपलब्ध कराने के लिए नई-नई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन कुछ अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि मिलकर इन योजनाओं को ही बंदरबांट का साधन बना रहे हैं।
इसी तरह रोहिना पंचायत में भी शासकीय कर्मियों से लेकर जनप्रतिनिधियों ने कथित रूप से मनरेगा कार्य में भारी गड़बड़ी को अंजाम दिया है।
1200 मीटर दर्ज, लेकिन जमीन पर 1000 मीटर भी नहीं–
ग्रामीणों के अनुसार सड़क की लंबाई कागज में 1200 मीटर दर्ज है, परंतु भौतिक सत्यापन करें तो यह 1000 मीटर भी पूरी नहीं होती! सड़क का मापदंड भी हर जगह अलग अलग प्रतीत होता है.
इसके अलावा—
कई स्थानों पर सड़क की चौड़ाई मानकों के अनुरूप नहीं है.
रोड के बीचों बीच घास भी उग आई है.
गिट्टी व मुरम की परतें गायब दिखाई देती हैं।
यह स्थिति सिर्फ घटिया काम ही नहीं, बल्कि स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।
आर ई एस विभाग की एन ओ सी पर भी सवाल उठने लगा है.
ग्रामीणों ने दावा किया कि आर ई एस विभाग, जो जांच एजेंसी भी है, इसने बिना सही निरीक्षण के ही सड़क को एन ओ सी जारी कर दी। यह प्रश्न खड़ा करता है कि आखिर इतने बड़े प्रकरण में विभाग की भूमिका क्या रही..??
WBM सड़क कार्य में-
कार्य प्रारंभ तिथि 13.02.23 अंकित है, पूर्ण तिथि 20.08.23 है जबकि RES विभाग द्वारा सत्यापन कर noc दिया गया है तो फिर महज 1.5 साल में ही सड़क की स्थिति ऐसी क्यूँ सवाल उठना लाजिम है!
ग्रामीणों का आरोप – “19 लाख रुपये आखिर गए कहाँ..??”
ग्रामीणों ने कहा––
19 लाख रुपये कोई छोटी रकम नहीं है। यह जनता की मेहनत का पैसा है। जांच होनी चाहिए कि किसके खाते में कितनी राशि गई और सड़क में कितना मटेरियल लगा हैl
… आरोपितों में कई जिम्मेदार नाम!!!
ग्रामीणों ने निम्न पर कार्रवाई की मांग की है—
तत्कालीन सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, जनपद और आर ई एस के निरीक्षण अधिकारी!
ग्रामीणों का आरोप है कि इन सभी की मिलीभगत से घटिया सड़क का निर्माण कराया गया और कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान ले लिया गया।
जांच की मांग तेज —
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से सड़क की पुनः भौतिक जांच, मनरेगा राशि की ऑडिट और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
जनपद सीईओ पीयूष सिंह ठाकुर –
मामले की जानकारी मिली है, शिकायत आरटीआई देखा है, संज्ञान में लिया जाएगा, शिकायतकर्ता को मामले की जानकारी रिपोर्ट देना चाहिए, इस मामले में जांच कार्यवाही की जाएगी.

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