January 17, 2026

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मंडी बोर्ड की गैर हाज़री में लाखों करोड़ों का निर्माण कार्य प्रगति पर..

कार्य की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल , ग्रामीणों में रोष

महासमुंद- सरायपाली // मोहम्मद इरफान शेख :

एक ओर जहां राज्य शासन किसानों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर विभिन्न योजनाएं लागू कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ठेकेदारों और कुछ अधिकारियों की लापरवाही से इन योजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

सरायपाली क्षेत्र में मंडी बोर्ड के अधीन चल रहे कई निर्माण कार्य इंजीनियर की गैरहाजिरी में जारी हैं, जिससे न केवल नियमों की अनदेखी हो रही है, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
स्थिति ये है, कितनी लागत का काम हो रहा है, यह भी किसी को नहीं पता है।

मामला सरायपाली ब्लॉक के तोरेसिंघा सहकारी समिति के अधीन उपार्जन केंद्र जंगलबेड़ा में धान भंडारण के लिए शेड (स्टेग) और गोदाम का निर्माण कार्य किया जा रहा है। नियमों के मुताबिक इस कार्य की निगरानी संबंधित इंजीनियर को करनी चाहिए, परंतु यहां बिना किसी टेक्निकल सुपरविजन के ठेकेदार द्वारा स्वयं कार्य कराया जा रहा है। आश्चर्य की बात तो यह हो गई कि निर्माण स्थल पर सूचना पटल तक नहीं लगाया गया है।
रविवार को भी निर्माण कार्य जारी रहा, लेकिन मौके पर किसी भी अधिकारी या इंजीनियर की उपस्थिति नहीं दिखी।

इस संबंध में जब मंडी सचिव सुशील कुमार साहू —
से बात की गई, तो उन्होंने कहा, उपार्जन केंद्रों में जो भी निर्माण कार्य चल रहे है, वे सभी “छत्तीसगढ़ मंडी बोर्ड” रायपुर के माध्यम से कराए जा रहे हैं। हमें इस मामले की कोई जानकारी नहीं दी गई है।

ठेकेदार ने चुप्पी साधी :

स्थानीय सूत्रों ने बताया कि इस परियोजना में अल्ट्राटेक कंपनी के सीमेंट के उपयोग का प्रावधान है, जबकि निर्माण स्थल पर सीसी ब्रांड के सीमेंट का प्रयोग किया जा रहा है। जब इस संबंध में ठेकेदार नायक से पूछा गया, तो उन्होंने किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।

ट्रांसफॉर्मर से बिजली चोरी –

मौके पर एक और गंभीर अनियमितता देखने को मिली। निर्माण स्थल के पास स्थित ट्रांसफॉर्मर से सीधे बिजली तार जोड़कर बिजली चोरी की जा रही है। यह स्थिति न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी अत्यंत खतरनाक है। बताया जा रहा है कि उपार्जन केंद्र सेमलिया सहित कई अन्य स्थानों पर भी इसी प्रकार बिना तकनीकी पर्यवेक्षण के निर्माण कार्य जारी है।

40 दुकानें बना रहा मंडी बोर्ड –

इसी तरह, मंडी बोर्ड द्वारा नगर सरायपाली के पुरानी मंडी वार्ड-11, में लाखों-करोड़ों की लागत से करीब 40 दुकानों वा शेड का निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि रायपुर से आने वाले इंजीनियर कभी-कभार ही साइट का निरीक्षण करने आते हैं और औपचारिक जांच के बाद लौट जाते हैं। इस ढिलाई के कारण निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

इस काम पर हमारा अधिकार नहीं –

वहीं तोरेसिंघा सहकारी समिति के मैनेजर युवराज नायक ने बताया कि हमें उपार्जन केंद्र में हो रहे निर्माण कार्य की जानकारी है, लेकिन पूरा काम मंडी बोर्ड रायपुर की ओर से कराया जा रहा है। इस पर टिप्पणी करना हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है।

पारदर्शिता और गुणवत्ता पर सवाल –

कुल मिलाकर, मंडी बोर्ड – रायपुर की निगरानी के अभाव में ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि इस पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया तो करोड़ों रुपये की लागत से बनाए जा रहे ये ढांचे भविष्य में किसानों की सुविधा की बजाय भ्रष्टाचार की मिसाल बन सकते हैं!

आपको बता दें कि विकासखंड सरायपाली अंतर्गत ज्यादातर उपार्जन केंद्रों में लाखों करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए फड़/ स्टेग, गोदाम भवन महज कुछ सालों में ही टूट फुट गए हैं ज़र जर स्थिति में है और इनका रखरखाव भी नहीं होता!

इसी तारतम्य मे-
नाम ना छापने की शर्त पर एक शासकीय अधिकारी ने बताया कि-
प्राधिकृत अधिकारी जो ऊपर बैठे हुए है वे कार्य पूर्ण होने पर हमसे noc मांगते है जबकि-
ज्ञात हो कि इसी प्रकार का एक निर्माण कार्य का मामला ग्राम “धामन गुड़कुरि ” केंद्र (बसना क्षेत्र) में हुआ था और घटिया निर्माण पर ग्रामीणों के आक्रोश के चलते जांच हुई , निर्माण कार्य पर सवाल उठा और दोबारा निर्माण कर सुधार किया गया. साथ ही अधिकारी ने बताय की कार्य पूर्ण होने पर नेतागण फीता काटने/ उद्घाटन करने पहुच जाते है और मलाई भी वही खाते हैं और बदनाम हम ही होते हैं!