बीजिंग.चीन भले ही कर्ज के चलते दुनिया के कई देशों को अपना ‘गुलाम’ बना रहा हो लेकिन उन देशों में चीनी नागरिकों के खिलाफ लोगों का गुस्सा भड़का हुआ है। चीन पड़ोसी देश पाकिस्तान का सबसे करीबी सहयोगी है लेकिन पिछले दिनों वहां भी चीनी नागरिकों को निशाना बनाया गया। विदेशों में अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित चीन अब बड़ा कदम उठाने जा रहा है। चीनी निवेश और चीनी नागरिकों पर हमलों के साथ-साथ बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजनाओं के बारे में लोगों के बीच नकारात्मक धारणा बन रही है। इन सबके बीच, सुरक्षा बीजिंग का शीर्ष एजेंडा बन गया है। द एचके पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ड्रैगन विदेशों में चीनी नागरिकों और बीआरआई परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए सुरक्षा फर्मों को तैनात करने पर विचार कर रहा है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनफिंग ने हाल ही में समाप्त हुई सीसीपी की 20वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के दौरान इस ओर एक व्यापक संकेत दिया था। द एचके पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बीआरआई चीन की महत्वाकांक्षी योजना है। इसमें ड्रैगन ने अरबों अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। लेकिन बीआरआई परियोजनाओं को कई देशों में आतंकवादियों और असंतुष्ट तत्वों से तोड़फोड़ के खतरों का सामना करना पड़ रहा है। चीनी राष्ट्रपति ने 20वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के दौरान कहा, “हम विदेशी सुरक्षा सुनिश्चित करने और चीनी नागरिकों और विदेशों में कानूनी संस्थाओं के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा करने की अपनी क्षमता को मजबूत करेंगे।”
चीनी राष्ट्रपति का बयान उनके नागरिकों की सुरक्षा खतरे को दर्शाता है। चीन ने पाकिस्तान, म्यांमार, श्रीलंका, नाइजीरिया, दक्षिण सूडान और लीबिया में कई बीआरआई परियोजनाएं शुरू की हुई हैं। चीन को डर है कि इन देशों में बीआरआई परियोजनाओं में लगे चीनी लोगों की सुरक्षा को खतरा है और उनकी सुरक्षा करने के लिए बड़े कदम उठाने की जरूरत है। चीन को इस बात की भी डर सता रहा है कि उसके नागरिकों पर इन देशों में आतंकी हमलों का भी सामना करना पड़ सकता है।

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