नई दिल्ली. आयुर्वेद के अनुसार, दही स्वाद में खट्टा, गर्म प्रकृति का होता है। इसी के साथ दही को पचाने में काफी समय लग जाता है। यह फैट बढ़ाता है, ताकत में सुधार, कफ और पित्त बढ़ाता है (कम वात), अग्नि में सुधार (पाचन शक्ति) करता है।
दही से जुड़े इंटरेस्टिंग फैक्ट्स
1) बारिश के मौसम में अक्सर लोग दही को गर्म करके खाने की सलाह देते हैं। जबकि दही को गरम नहीं करना चाहिए। यह गर्म करने के कारण अपने गुणों को खो देता है।
2) मोटापे, कफ विकार, ब्लीडिंग और सूजन की स्थिति वाले लोगों को दही से बचना सबसे अच्छा है।
3) रात के समय दही नहीं खाना चाहिए।
4) दही रोज नहीं खाना चाहिए। हालांकि, मट्ठा छाछ जिसमें सेंधा नमक, काली मिर्च और जीरा जैसे मसाले मिलाए गए हैं, उसको रोजाना डायट में शामिल किया जा सकता है।
5) अपने दही को फलों के साथ न मिलाएं क्योंकि यह एक चैनल ब्लॉकर है। लंबे समय तक खाने से मेटाबॉलिज्म संबंधी समस्याएं और एलर्जी हो सकती है।
6) दही मांस और मछली के साथ खराब है। चिकन, मटन या मछली जैसे मांस के साथ पकाए गए दही से शरीर में टॉक्सिन बढ़ते हैं।
अगर आप दही खाना चाहते हैं, तो इसे कभी-कभार, दोपहर के समय और कम मात्रा में लें। जिन लोगों के पास यह नहीं है उनके लिए- सबसे अच्छा ऑप्शन छाछ है

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