नई दिल्ली. पीरियड्स का आना एक महिला की जिंदगी में बेहद जरूरी होता है। एक महिला के पूरी जिंदगी में करीब 30 से 34 साल तक पीरियड्स आते हैं। प्रजनन क्षमता से जुड़ा ये चक्र पूरी तरह से जिंदगी के रूटीन में शामिल होता है। ऐसे में जब पीरियड आना बंद होता है तो महिलाओं के शरीर में काफी सारे बदलाव देखने को मिलते हैं। ये बदलाव मेंटली और फिजिकली दोनों तरह के होते हैं। जिनसे अकेले वो महिला ही निपट सकती है। पीरियड बंद होने को मेनोपॉज कहते हैं। 45 से 50 साल की उम्र आते-आते पीरियड पूरी तरह बंद हो जाते हैं। हालांकि कुछ महिलाओं को समय से पहले भी मेनोपॉज हो जाता है। मेनोपॉज होने पर महिलाओं के शरीर में ये बदलाव दिखने लगते हैं।
पीरियड्स बंद होने पर ये संकेत दिखने लगते हैं
बता दें कि मेनोपॉज कभी भी अचानक नहीं होता। ये धीरे-धीरे समय के साथ होता है। इसलिए शरीर में तमाम तरह के लक्षण दिखने लगते हैं।
अनियमित मासिक धर्म
हॉट फ्लैश यानी अचानक गर्मी महसूस होना और अचानक ठंड महसूस होना
रात को सोते-सोते बहुत ज्यादा पसीना आना, गर्मी ना होने पर भी हद से ज्यादा पसीना निकलना
बार-बार मूड बदलना
डिप्रेशन
चिड़चिड़ापन
नींद ना आना, थकान, सिरदर्द
किसी काम में मन ना लगना या ध्यान ना लगना
मेनोपॉज की वजह से सेक्स लाइफ पर भी पड़ता है असर
मेनोपॉज की वजह से सेक्स हार्मोंस कम हो जाते हैं।
वजाइना का ड्राई होना
यूरीन इंफेक्शन का ज्यादा खतरा
स्किन सेंसेटिव और ड्राई होना
हाई कोलेस्ट्रॉल का होना
मेनोपॉज की मुश्किलों को इन तरीकों से हल करें
लाइफस्टाइल में बदलाव
मेनोपॉज के लक्षण दिखने पर अपनी डेली रूटीन और खानपान को सुधारें। साथ ही एक्सरसाइज को रूटीन में शामिल करें। जिससे कि नींद अच्छी आए।
रात को पसीना आता है तो नहाकर सोएं। जिससे कि शरीर ठंडा रहे। हल्के और आरामदायक कपड़े पहनें।
साइकोलॉजिस्ट के पास जाएं
अगर पीरियड्स बंद होने की स्थिति में डिप्रेशन, तनाव और अवसाद महसूस हो रहा या अकेले रहने का दिल करता है तो किसी थेरेपिस्ट से मिलें या फिर साइकोलॉजिस्ट के पास जाएं।

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