क्या आपने कभी सोचा है कि सिर्फ 40 सेकेंड तक जीभ बाहर निकालने जैसी साधारण क्रिया आपके शरीर और दिमाग पर सकारात्मक असर डाल सकती है? सुनने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन हाल के वर्षों में तनाव कम करने वाली कुछ तकनीकों और योग अभ्यासों को लेकर लोगों की रुचि बढ़ी है। इन्हीं में से एक है जीभ को बाहर निकालकर कुछ समय तक रहने की प्रैक्टिस, जो योग में सिंहासन (सिंह मुद्रा) से जुड़ी मानी जाती है।
हालांकि इस विषय पर किए गए दावों को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित हैं, लेकिन कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह अभ्यास शरीर को रिलैक्स करने और मानसिक तनाव कम करने में मदद कर सकता है।
क्या है 40 सेकेंड जीभ बाहर निकालने की तकनीक?
इस अभ्यास में व्यक्ति आरामदायक स्थिति में बैठकर अपनी जीभ को पूरी तरह बाहर निकालता है और कुछ समय तक उसी अवस्था में रहता है। कई लोग इसे गहरी सांसों के साथ करते हैं, जिससे रिलैक्सेशन का प्रभाव और बढ़ सकता है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्रिया चेहरे, जबड़े और गर्दन की मांसपेशियों में जमा तनाव को कम करने में मदद करती है।
शरीर में क्या बदलाव महसूस हो सकते हैं?
यदि यह अभ्यास नियमित रूप से किया जाए, तो कुछ लोगों को निम्नलिखित लाभ महसूस हो सकते हैं:
- मानसिक तनाव में कमी
- शरीर को रिलैक्स महसूस होना
- जबड़े और गर्दन की जकड़न कम होना
- गहरी सांस लेने में आसानी
- मूड में सुधार
- चिंता और बेचैनी में राहत
हालांकि ये प्रभाव व्यक्ति-व्यक्ति पर अलग हो सकते हैं।
कॉर्टिसोल लेवल से क्या संबंध है?
कॉर्टिसोल को “स्ट्रेस हार्मोन” कहा जाता है। जब हम तनाव में होते हैं तो शरीर अधिक कॉर्टिसोल बनाता है। लंबे समय तक कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ा रहने से नींद, मूड, वजन और स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि रिलैक्सेशन आधारित तकनीकें और योगासन शरीर की तनाव प्रतिक्रिया को कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि सिर्फ जीभ बाहर निकालने से कॉर्टिसोल कम होने के दावे को अभी व्यापक वैज्ञानिक शोधों द्वारा स्पष्ट रूप से साबित नहीं किया गया है।
40 सेकेंड का समय क्यों बताया जाता है?
इस तकनीक के समर्थकों का कहना है कि शुरुआती कुछ सेकेंड में मांसपेशियां तनाव की स्थिति में रहती हैं, जबकि थोड़ी देर बाद शरीर धीरे-धीरे रिलैक्स होने लगता है। इसी वजह से 40 सेकेंड का समय सुझाया जाता है।
हालांकि यह कोई वैज्ञानिक रूप से तय सार्वभौमिक नियम नहीं है और इस पर अधिक शोध की आवश्यकता है।
सिंहासन मुद्रा क्या है?
योग में सिंहासन या सिंह मुद्रा एक प्रसिद्ध अभ्यास है। इसमें:
- वज्रासन में बैठा जाता है।
- दोनों हाथ घुटनों या जमीन पर रखे जाते हैं।
- गहरी सांस ली जाती है।
- जीभ को पूरी तरह बाहर निकाला जाता है।
- आंखों को ऊपर की ओर केंद्रित किया जाता है।
- धीरे-धीरे सांस छोड़ी जाती है।
यह मुद्रा चेहरे, गले और श्वसन तंत्र को सक्रिय करने वाली मानी जाती है।
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
यदि आपको निम्न समस्याएं हैं तो किसी योग विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर होगा:
- गंभीर गर्दन दर्द
- जबड़े की समस्या
- हाल ही में मुंह या गले की सर्जरी
- न्यूरोलॉजिकल बीमारी

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